Ranchi : झारखंड की राजनीति में कांग्रेस ने बड़ा सियासी दांव खेलते हुए प्रणव झा को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है. दिल्ली में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालने वाले प्रणव झा को पार्टी नेतृत्व अब झारखंड से संसद भेजने की तैयारी में है. अब तक पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बनाने वाले प्रणव झा के सामने पहली बार खुली राजनीतिक परीक्षा होगी.
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कांग्रेस की राह आसान नहीं, JMM-राजद और माले का साथ अनिवार्य
राज्यसभा चुनाव में प्रणव झा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सहयोगी दलों का समर्थन हासिल करना है. जेएमएम, राजद और भाकपा माले के 12 विधायकों के बिना जीत का गणित पूरा नहीं होगा.इसके अलावा कांग्रेस को अपने सभी विधायकों को भी एकजुट बनाए रखना होगा.
कांग्रेस संगठन में वर्षों से सक्रिय भूमिका
कांग्रेस लंबे समय बाद ऐसे नेता को राज्यसभा भेजने की तैयारी में है. जिसकी ताकत चुनावी भीड़ नहीं, बल्कि संगठनात्मक पकड़ मानी जाती है. प्रणव झा को पार्टी के भीतर एक रणनीतिक और भरोसेमंद चेहरा माना जाता है. अगर वे संसद पहुंचते हैं तो झारखंड और कांग्रेस हाईकमान के बीच उनकी भूमिका अहम हो सकती है.
प्रणव झा लंबे समय से कांग्रेस के केंद्रीय संगठन से जुड़े रहे हैं. 2017 में उन्हें पार्टी के संचार विभाग में सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी. इससे पहले वे मीडिया को ऑर्डिनेटर के रूप में भी सक्रिय रहे और संगठनात्मक रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे.

मल्लिकार्जुन खरगे के भरोसेमंद सहयोगी माने जाते हैं प्रणव झा
जब मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस अध्यक्ष बने थे, तब उनके कार्यालय को मजबूत करने के लिए चार नेताओं को विशेष समन्वयक नियुक्त किया गया था. इन नेताओं में प्रणव झा का नाम भी शामिल था.प्रणव झा की जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष कार्यालय और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की थी। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठनात्मक तौर पर अहम भूमिका दी थी.
इसके बाद अगस्त 2024 में कांग्रेस के बड़े संगठनात्मक फेरबदल के दौरान प्रणव झा को एआईसीसी सचिव बनाया गया. इस नियुक्ति को पार्टी में उनकी बढ़ती राजनीतिक और संगठनात्मक भूमिका के संकेत के तौर पर देखा गया.कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी देकर साफ कर दिया कि संगठन में उनकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही है.
झारखंड से उम्मीदवार बनाने के पीछे क्या है सियासी प्लान?
कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए ऐसे नेता पर भरोसा जताया है जो संगठन में पर्दे के पीछे रहकर काम करने के लिए पहचाने जाते हैं. प्रणव झा को दिल्ली नेतृत्व का करीबी माना जाता है.विशेषज्ञों के अनुसार पार्टी ने संगठन में उनकी सक्रियता और नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल को देखते हुए यह निर्णय लिया है.
संगठन और मीडिया दोनों पर मजबूत पकड़ रखते हैं प्रणव झा
प्रणव झा लंबे समय से कांग्रेस के केंद्रीय संगठन का अहम हिस्सा रहे हैं. करीब दो दशकों से वे पार्टी के भीतर मीडिया प्रबंधन और संगठनात्मक समन्वय की जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं. वर्तमान में वे कांग्रेस अध्यक्ष कार्यालय से सीधे जुड़े हुए हैं.एआईसीसी सचिव के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर काम कर चुके प्रणव झा अब पहली बार बड़े संसदीय चुनाव के उम्मीदवार बनने के कारण राष्ट्रीय सुर्खियों में हैं. पार्टी के भीतर रणनीतिक भूमिका निभाने वाले झा अब सीधे राजनीतिक मैदान में नजर आ रहे हैं.
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