RANCHI : झारखंड के गोड्डा जिले के निमाकला गांव के रहने वाले युवा खिलाड़ी देवगन मरांडी इन दिनों देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी चर्चा का विषय बने हुए हैं. उन्होंने मिक्स्ड मार्शल आर्ट (MMA) में ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. देवगन मरांडी ने कोलकाता में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय MMA मुकाबले में नेपाल के अंतरराष्ट्रीय फाइटर सुनील पाल को महज 17 सेकंड में पराजित कर शानदार जीत दर्ज की. मुकाबले में उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और अपने दमदार पंचों से प्रतिद्वंद्वी को धराशायी कर दिया. यह मुकाबला उन्होंने 11-3 के अंतर से अपने नाम कि.
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देवगन मरांडी झारखंड के एक छोटे से गांव निमाकला से आते हैं. सीमित संसाधनों और बेहतर सुविधाओं के अभाव के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर यह मुकाम हासिल किया है. कुछ ही समय पहले उनका चयन मिक्स्ड मार्शल आर्ट (MMA) में हुआ था और अब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहली जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया. देवगन की खेल यात्रा दिल्ली से शुरू हुई. इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में लगातार तीन मुकाबले जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया. इसके बाद उन्होंने देशभर की कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया. अब तक खेले गए 14 मुकाबलों में से 11 में जीत दर्ज कर चुके हैं, जो उनकी लगातार बेहतर होती प्रदर्शन क्षमता को दर्शाता है. देवगन मरांडी का सपना दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मिक्स्ड मार्शल आर्ट संस्था UFC में खेलना और चैंपियन बनकर भारत का तिरंगा बुलंद करना है. उनका कहना है कि यदि राज्य सरकार और संबंधित खेल संस्थाओं से बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और आर्थिक सहयोग मिले, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व कर सकते हैं.
अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में जीत दर्ज करने के बाद जब देवगन मरांडी अपने पैतृक गांव निमाकला पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. ढोल-नगाड़ों, मांदर की थाप और आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति के बीच उनका भव्य अभिनंदन किया गया. गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कोई विजयी योद्धा अपने घर लौटा हो. हालांकि, इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बावजूद उनके स्वागत में कोई स्थानीय नेता, विधायक या मंत्री नजर नहीं आया. गांव पहुंचने के बाद देवगन मरांडी ने ग्रामीणों के साथ सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और अपनी जीत उन सभी युवाओं को समर्पित की, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं.
