रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने खूंटी जिले में एक आदिवासी महिला की कथित चिकित्सीय लापरवाही से हुई मौत के मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है. इसके साथ ही अर्जुन मुंडा ने आदिवासी बहुल और सुदूरवर्ती क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया है.

क्या है मामला ?
अर्जुन मुंडा के पत्र के अनुसार, खूंटी प्रखंड के बगड़ू गांव की निवासी आदिवासी महिला स्वर्गीय बुधन पूर्ति की बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर, खूंटी में उपचार के दौरान कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण मृत्यु हो गई.
मुंडा ने कहा कि यह घटना केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति नहीं है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता, जवाबदेही और मानवीय दायित्वों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है.
पीड़ित परिवार को सम्मानजनक मुआवजा तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अस्पतालों में खून चढ़ाने की प्रक्रिया की सख्त निगरानी की माँग की। स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और वंचित वर्गों के जीवन के साथ खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।@India_NHRC pic.twitter.com/MUFuZI1K4N
— Arjun Munda (@MundaArjun) July 19, 2026
यह आत्ममंथन का विषय
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अर्जुन मुंडा ने कहा कि झारखंड की पहचान आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों के संरक्षण से जुड़ी रही है. ऐसे राज्य में यदि एक आदिवासी महिला की उपचार के दौरान कथित लापरवाही से मौत होती है, तो यह पूरे तंत्र के लिए आत्ममंथन का विषय है.
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाएं व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को कमजोर करती हैं.
संविधान की भावना भी होती है प्रभावित
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि एक ओर आदिवासी हितों की रक्षा और संवैधानिक अधिकारों की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर यदि इलाज के दौरान किसी आदिवासी महिला की जान चली जाती है, तो यह केवल चिकित्सीय विफलता नहीं, बल्कि संविधान की उस भावना को भी प्रभावित करता है, जो समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को विशेष संरक्षण देने की अपेक्षा करती है.
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का असर केवल स्वास्थ्य व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आदिवासी समाज का सरकारी संस्थाओं और प्रशासन पर विश्वास भी प्रभावित होता है.
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग
अर्जुन मुंडा ने कहा कि इस मामले को केवल एक अलग-थलग चिकित्सीय त्रुटि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. इसके बजाय आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता और संस्थागत जवाबदेही की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए.
उन्होंने पत्र में कहा कि आज भी राज्य के कई आदिवासी और सुदूरवर्ती इलाकों में मृत्यु दर चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में चिकित्सीय लापरवाही से होने वाली मौतें स्थिति को और गंभीर बना देती हैं.
सरकार से की ये मांग
अपने पत्र में अर्जुन मुंडा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि
- मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए.
- दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त और विधिसम्मत कार्रवाई की जाए.
- आदिवासी बहुल और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
- सरकारी अस्पतालों की जवाबदेही और चिकित्सा व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित किया जाए.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करना आवश्यक है, ताकि लोगों का सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर विश्वास कायम रह सके.
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