PALAMU : शिक्षिका भारती पांडेय से जुड़े मामले में जिला प्रशासन ने विभागीय कार्रवाई करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के एक लिपिक को निलंबित कर दिया है. वहीं दूसरे लिपिक का तबादला कर दिया गया है. इस मामले में विभागीय जांच के साथ चिकित्सकीय रिपोर्ट भी सामने आई है, जिसमें कई महत्वपूर्ण तथ्य दर्ज किए गए हैं.
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जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में कार्यरत लिपिक ईश्वरी दयाल राम को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. वहीं अरुण कुमार गिरि को डीईओ कार्यालय से हटाकर गढ़वा जिले के रंका स्थित क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में पदस्थापित किया गया है.
प्रसव के दौरान हुई थी नवजात की मौत
गौरतलब है कि 25 जुलाई को शिक्षिका भारती पांडेय साहित्य समाज चौक स्थित सोना नर्सिंग होम पहुंची थीं. यहां प्रसव के दौरान चिकित्सकीय जांच में गर्भस्थ शिशु मृत पाया गया, जिसके बाद चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत प्रसव कराया गया.
पति ने लगाए थे गंभीर आरोप
घटना के बाद शिक्षिका के पति मुकेश कुमार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे. उनका कहना था कि भारती पांडेय, जो तरहसी प्रखंड के सिलदिलीया प्लस टू हाई स्कूल में कार्यरत हैं और चैनपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में प्रतिनियुक्त थीं, उन्होंने छुट्टी के लिए आवेदन दिया था.
मुकेश कुमार का आरोप था कि छुट्टी स्वीकृत कराने के लिए कई दिनों तक डीईओ कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्यालय के कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर बिना पैसे छुट्टी स्वीकृत नहीं होने की बात कही. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

विभागीय जांच में क्या सामने आया
विभागीय जांच रिपोर्ट के अनुसार, 21 जुलाई 2026 को सोना नर्सिंग होम में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषिता सिंह ने जांच के दौरान शिक्षिका में Leaking P/V की शिकायत मिलने पर तत्काल भर्ती होकर उपचार कराने की सलाह दी थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि मरीज ने उस समय भर्ती होने से इनकार कर दिया.
जांच में यह भी उल्लेख है कि 24 जुलाई को दोबारा भर्ती होने की सलाह दी गई थी, लेकिन उस समय भी अस्पताल में भर्ती नहीं हुईं. इसके बाद 25 जुलाई को जब वह फिर नर्सिंग होम पहुंचीं तो अल्ट्रासाउंड में गर्भस्थ शिशु मृत पाया गया और आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की गई.
मातृत्व अवकाश नहीं, चाइल्ड केयर लीव का आवेदन
जिला प्रशासन के अनुसार, जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि शिक्षिका की ओर से मातृत्व अवकाश के लिए कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया था. विभाग को दिया गया आवेदन शिशु देखभाल अवकाश (Child Care Leave) से संबंधित था, जिसमें अपनी सात वर्षीय बेटी अदिति कुमारी की देखभाल के लिए अवकाश का अनुरोध किया गया था.
प्रशासन ने कही यह बात
पलामू जिला प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले में उपलब्ध तथ्यों और विभागीय जांच के आधार पर कार्रवाई की गई है. प्रशासन ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और विभागीय कदम उठाए जाएंगे.
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