नई दिल्ली : छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने संगठन और सरकार दोनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.ओडिशा से राष्ट्रीय राजनीति तक का उनका सफर लगातार आगे बढ़ता रहा, लेकिन जुलाई 2026 में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े कथित पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलनों के बीच उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

धर्मेंद्र प्रधान को भाजपा के प्रभावशाली रणनीतिकारों में माना जाता रहा है. संगठन में लंबे अनुभव, चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारियों और कई अहम मंत्रालयों का नेतृत्व करने के कारण वे पार्टी नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में शामिल रहे.
राजनीतिक परिवार से संबंध
धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के एक राजनीतिक परिवार में हुआ. उनके पिता देबेंद्र प्रधान पेशे से चिकित्सक थे और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे. वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे. बचपन से ही धर्मेंद्र प्रधान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गतिविधियों से जुड़े रहे, जिसने उनके राजनीतिक और वैचारिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
छात्र राजनीति से की शुरुआत
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की. उन्होंने तालचर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की सदस्यता ली. उनकी संगठनात्मक यात्रा लगातार आगे बढ़ती रही,1985 में कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष बने,1990 में छात्रसंघ का चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा,1993 में एबीवीपी के ओडिशा राज्य सचिव बने,1995 में संगठन के राष्ट्रीय सचिव बनाए गए, उन्होंने भुवनेश्वर स्थित उत्कल विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान (एंथ्रोपोलॉजी) में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की.
भाजपा में प्रवेश और विधानसभा तक का सफर
अपने पिता के राजनीतिक मार्ग पर चलते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने 1998 में भारतीय जनता पार्टी की सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया. साल 2000 में वे ओडिशा के पल्लाहारा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए. विधायक के रूप में उनके काम को सराहा गया और उन्हें उत्कलमणि गोपबंधु प्रतिभा सम्मान से सम्मानित किया गया.
इसके बाद संगठन में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई. वे भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे और कई राज्यों में पार्टी संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाली.
राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता कद
साल 2004 में धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा की देवगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. इसके बाद 2012 में वे राज्यसभा पहुंचे. 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद उन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई. उनके कार्यकाल में उज्ज्वला योजना और एलपीजी कनेक्शन के विस्तार को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिना गया. बाद में उन्होंने इस्पात, कौशल विकास और उद्यमिता जैसे मंत्रालयों का भी नेतृत्व किया.
शिक्षा मंत्री के रूप में नई जिम्मेदारी
जुलाई 2021 में धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का दायित्व दिया गया. उनके सामने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लागू करने जैसी बड़ी जिम्मेदारी थी. उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में कई सुधारों और नई नीतियों को आगे बढ़ाने की कोशिश की। 2024 के लोकसभा चुनाव में वे ओडिशा की संबलपुर सीट से जीतकर फिर लोकसभा पहुंचे और तीसरी एनडीए सरकार में भी शिक्षा मंत्री बने रहे.
NEET विवाद और बढ़ता छात्र आंदोलन
जुलाई 2026 में NEET परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद देशभर में छात्र आंदोलन तेज हो गए. दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई शहरों में छात्रों और अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किए. विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और जवाबदेही तय करने की मांग की. इसी बढ़ते राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
उतार-चढ़ाव से भरा राजनीतिक सफर
धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक जीवन छात्र नेता से शुरू होकर विधायक, सांसद, भाजपा संगठन के रणनीतिकार और केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री तक पहुंचा। संगठन और सरकार में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती रही, लेकिन शिक्षा मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल परीक्षा संबंधी विवादों और छात्रों के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच समाप्त हुआ.
उनका राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि संगठन में लंबे समय तक काम करने वाला नेता राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हासिल कर सकता है। वहीं, यह घटनाक्रम यह भी दिखाता है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी बड़े विवाद का राजनीतिक असर कितना व्यापक हो सकता है.
