रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है. मामले की जांच कर रही सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने रिमांड पर लिए गए पांच मुख्य आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ शुरू कर दी है.जांच के पहले ही दिन एसआईटी ने ऐसे सवाल पूछे, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

सीआईडी का सबसे अहम सवाल यह था कि गंभीर लापरवाही और वित्तीय विवादों के कारण पहले से ब्लैकलिस्ट की जा चुकी कंपनी को आखिर किस आधार पर जेपीएससी की संवेदनशील परीक्षाओं का जिम्मा सौंपा गया. सूत्रों के अनुसार, इस सवाल पर जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं.
पांच आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ
सीआईडी की एसआईटी ने जिन पांच आरोपियों से पूछताछ शुरू की है, उनमें शामिल हैं
- जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता
- टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के निदेशक रामबीर सिंह
- कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी
- तकनीकी प्रोग्रामर मो. उस्मान
- तकनीकी प्रोग्रामर मो. एबाद
एसआईटी इन सभी से पांच दिनों तक लगातार पूछताछ करेगी. अधिकारियों का मानना है कि आमने-सामने पूछताछ से बयान में विरोधाभास सामने आने पर पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट हो सकती है.
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को टेंडर देने पर सवाल
पूछताछ के दौरान एसआईटी ने श्वेता कुमारी गुप्ता और टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह से विस्तार से जानकारी मांगी.
जांच एजेंसी ने पूछा कि जब टीडीपीएल को पहले ही गंभीर लापरवाही और वित्तीय विवादों के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, तब उसे दोबारा जेपीएससी की महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं का टेंडर कैसे दिया गया. साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या इस निर्णय के पीछे किसी का दबाव या विशेष सिफारिश थी.
सूत्रों के अनुसार, श्वेता गुप्ता इस प्रश्न का स्पष्ट और संतोषजनक उत्तर नहीं दे सकीं. अब एसआईटी संबंधित दस्तावेजों, फाइलों और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान कर रही है.
जेएसएससी-सीजीएल चयन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
इधर, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा भी विवादों में आ गई है. सोशल मीडिया पर सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के रूप में चयनित अभ्यर्थी अंशुमान तिवारी के नाम से एक आवेदन पत्र वायरल हो रहा है. इस एक पृष्ठ के पत्र में भाषा और वर्तनी की कई गंभीर त्रुटियां दिखाई दे रही हैं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
हालांकि, अंशुमान तिवारी ने इस वायरल दस्तावेज से खुद को अलग बताते हुए कहा है कि उन्होंने आवेदन जरूर दिया था, लेकिन सोशल मीडिया पर प्रसारित पत्र उनका नहीं है और वह उससे मेल नहीं खाता.
दो और गिरफ्तार, गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़ी
जांच के दौरान सीआईडी ने शनिवार को दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं
- जेपीएससी कर्मचारी सोनू कुमार
- टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी के सहयोगी अरविंद कुमार
सीआईडी के अनुसार, इन दोनों पर परीक्षार्थियों की ओएमआर शीट में कथित हेराफेरी और डेटा टेंपरिंग में भूमिका निभाने का आरोप है. जांच एजेंसी इनकी भूमिका की भी विस्तार से पड़ताल कर रही है.
लोगों से मांगी जानकारी
सीआईडी ने इस मामले में आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है. यदि किसी व्यक्ति के पास भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से संबंधित कोई दस्तावेज, सूचना या अन्य साक्ष्य हैं, तो वे उन्हें सीआईडी के मोबाइल नंबर 9934309058 या ई-मेल complainjpsc-cid@jhpolice.gov.in पर साझा कर सकते हैं. एजेंसी ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी.
जेएलकेएम ने शुरू किया अनिश्चितकालीन सत्याग्रह
इस बीच, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विरोध भी तेज हो गया है. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) ने मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया है. पार्टी नेता देवेंद्र महतो के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने की मांग की जा रही है.
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
जेपीएससी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब केवल परीक्षा संचालन तक सीमित नहीं रह गई है. सीआईडी टेंडर प्रक्रिया, परीक्षा प्रबंधन, ओएमआर शीट, डेटा प्रोसेसिंग और भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की भी जांच कर रही है.
आने वाले दिनों में रिमांड पर चल रही पूछताछ और जब्त डिजिटल साक्ष्यों की जांच से इस मामले में कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है. फिलहाल, जांच एजेंसी का ध्यान यह पता लगाने पर है कि कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित थी या इसके पीछे कोई व्यापक नेटवर्क सक्रिय था.
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