रांची : झारखंड की राजधानी रांची में जहां एक ओर कई इलाकों के लोग नियमित पेयजल आपूर्ति के लिए जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की सबसे बड़ी जलापूर्ति योजना से हर दिन लाखों लीटर शुद्ध पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है. गेतलसूद (रुक्का) जलापूर्ति योजना, जो शहर की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी को पानी उपलब्ध कराती है, लंबे समय से पाइपलाइन लीकेज की गंभीर समस्या से जूझ रही है.

जमीनी पड़ताल में जल शोधन संयंत्र (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) से बूटी मोड़ तक लगभग आठ किलोमीटर के दायरे में 10 से अधिक बड़े लीकेज मिले. इन स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी मात्रा में शुद्ध पेयजल बहता देखा गया, जबकि शहर के कई इलाकों में लोग पर्याप्त पानी नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं.
₹34 करोड़ का रखरखाव, फिर भी नहीं थम रहा रिसाव
जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन और रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी विभाग ने निजी एजेंसी पाठक इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन को सौंपी है. इसके लिए एजेंसी को सालाना लगभग ₹34 करोड़ का ठेका दिया गया है. औसतन एजेंसी को प्रतिदिन करीब ₹3.14 लाख का भुगतान किया जाता है.
इसके बावजूद पाइपलाइन लीकेज की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. कई स्थानों पर मरम्मत के कुछ दिनों बाद ही पाइप फिर से रिसने लगती है, जबकि कुछ जगहों पर महीनों से लगातार पानी बह रहा है. इसका सीधा असर जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ रहा है. कहीं पानी का दबाव कम हो गया है तो कई इलाकों में नियमित आपूर्ति बाधित हो रही है.
सबसे बड़ा नुकसान : पानी बर्बाद, लोगों तक नहीं पहुंच रहा
लीकेज का सबसे अधिक असर शहर की जलापूर्ति पर दिखाई दे रहा है. बीआईटी मोड़ इलाके में पिछले तीन महीनों से जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित बताई जा रही है. विभाग और रखरखाव एजेंसी अब तक वास्तविक तकनीकी खराबी का पता नहीं लगा सके हैं. इस मामले में संबंधित एजेंसी और जूनियर इंजीनियर (जेई) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. वहीं, इंजीनियर-इन-चीफ ने भी तीन दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है.
कई इलाकों में नियमित जलापूर्ति नहीं
रांची के अनेक क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि उन्हें नियमित और पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है.
जलापूर्ति प्रभावित रहने वाले प्रमुख इलाकों में शामिल हैं -रातू रोड,किशोरगंज,कुम्हार टोली,पहाड़ी मंदिर क्षेत्र,मधुकम,अपर बाजार,मोरहाबादी,लालपुर,थड़पखना ,इन क्षेत्रों में कभी पानी देर से पहुंचता है तो कभी दबाव इतना कम होता है कि ऊपरी मंजिलों तक पानी नहीं चढ़ पाता।
आठ किलोमीटर में मिले 10 बड़े लीकेज
जमीनी निरीक्षण के दौरान जलापूर्ति पाइपलाइन में कई गंभीर लीकेज सामने आए. प्रमुख स्थान इस प्रकार हैं
नेवरी चौक (रिंग रोड)
यहां लगातार पाइपलाइन से पानी रिस रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है और बार-बार मरम्मत के बावजूद दोबारा शुरू हो जाती है.
नेवरी चौक से आगे
एक ही पाइपलाइन में बार-बार लीकेज हो रहा है. मरम्मत के कुछ दिनों बाद फिर से पानी बहने लगता है.
विकास हॉस्पिटल के सामने
जलापूर्ति शुरू होते ही पाइपलाइन से तेज रिसाव होता है, जिससे पूरी सड़क पानी से भर जाती है.
नेवरी पेट्रोल पंप के पास
सड़क किनारे बिछी पाइपलाइन से लगातार पानी बहता रहता है, जिससे बड़ी मात्रा में पेयजल व्यर्थ जा रहा है.
आईसीआईसीआई बैंक, बूटी मोड़ के पास
लीकेज के कारण सड़क पर हमेशा पानी जमा रहता है और यातायात भी प्रभावित होता है.
विकास इन्क्लेव के सामने
सड़क के बीचोंबीच पाइपलाइन से लगातार पानी निकलता रहता है.
महावीर नगर गेट
यहां पाइपलाइन में लगातार सीपेज हो रहा है, जिससे सड़क पर पानी जमा रहता है.
जुमार होटल के पास
यह स्थान लंबे समय से स्थायी लीकेज की समस्या से जूझ रहा है. यहां रोजाना बड़ी मात्रा में पानी बहता देखा गया.
समर्पण आई हॉस्पिटल के सामने
जलापूर्ति शुरू होते ही सड़क पूरी तरह पानी से भर जाती है. रिसाव काफी बड़ा है.
बीआईटी मार्ट के सामने
यहां पाइपलाइन से लगातार पानी बह रहा है, जिससे शुद्ध पेयजल की भारी बर्बादी हो रही है.
जल संरक्षण पर उठ रहे सवाल
एक ओर सरकार जल संरक्षण और जल बचाने के लिए लोगों को जागरूक करने के अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर शहर की मुख्य जलापूर्ति लाइन से प्रतिदिन लाखों लीटर शुद्ध पेयजल का रिसाव व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन लीकेज की समय रहते स्थायी मरम्मत की जाए, तो न केवल पानी की बर्बादी रोकी जा सकती है, बल्कि शहर के उन इलाकों तक भी बेहतर जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है जहां लोग लंबे समय से पानी की कमी का सामना कर रहे हैं.
अब निगाहें विभागीय कार्रवाई पर
बीआईटी मोड़ की जलापूर्ति बाधित होने और लगातार सामने आ रहे पाइपलाइन लीकेज के बाद विभाग ने संबंधित एजेंसी से जवाब मांगा है. इंजीनियर-इन-चीफ ने भी निरीक्षण रिपोर्ट तलब की है. अब यह देखना होगा कि विभाग केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रहता है या फिर जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार, पाइपलाइन की स्थायी मरम्मत और जवाबदेही तय करने के लिए ठोस कार्रवाई करता है. फिलहाल, रांची में हर दिन बहता शुद्ध पेयजल यह सवाल जरूर खड़ा कर रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों तक पानी पहुंचाने वाली व्यवस्था आखिर इतनी लापरवाह क्यों बनी हुई है.
