RANCHI : झारखंड की तपती धरती पर आखिरकार राहत की बूंदें गिरने लगी हैं. आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादलों ने दस्तक दे दी है और मानसून की आहट के साथ ही मौसम का मिजाज बदल गया है. भीषण गर्मी और उमस से बेहाल लोगों को जहां राहत मिली है, वहीं बारिश अपने साथ खतरे की घंटी भी लेकर आई है. झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय हो चुका है और राज्य के कई जिलों में झमाझम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है. कई इलाकों में तेज हवाएं चल सकती हैं और ठनका गिरने का भी खतरा बना हुआ है.

झारखंड में मानसून के साथ ठनका का अलर्ट
राजधानी रांची समेत पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, धनबाद और आसपास के जिलों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है. कहीं रिमझिम फुहारें पड़ रही हैं तो कहीं तेज बारिश लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रही है. खेतों की ओर टकटकी लगाए बैठे किसानों के चेहरों पर उम्मीद की नई किरण जगी है, क्योंकि मानसून की यह बारिश खेती-किसानी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जाती. हालांकि राहत के इस मौसम के बीच सावधानी भी बेहद जरूरी है. हाल के दिनों में ठनका की चपेट में आने से कई लोगों की जान जा चुकी है. मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें. खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा न करें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें. झारखंड के लिए यह मानसून सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि उम्मीदों का मौसम है. सूखी पड़ती धरती की प्यास बुझाने, किसानों की मेहनत को नई ऊर्जा देने और तपिश से राहत पहुंचाने वाला यह मौसम खुशियां लेकर आया है। लेकिन प्रकृति के इस बदलते तेवर के बीच सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है.
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बारिश की हर बूंद राहत का संदेश दे रही है, लेकिन आसमान से गिरती बिजली यह भी याद दिला रही है कि मौसम का आनंद तभी है, जब सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए. झारखंड में अब बादलों का राज शुरू हो चुका है। ऐसे में एक हाथ में छाता और दूसरे हाथ में सतर्कता लेकर ही घर से निकलना समझदारी होगी.
