रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की जांच अब एक नए चरण में पहुंच गई है. राज्य की अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित सभी अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर उनकी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने को कहा है. जांच एजेंसी का कहना है कि फॉरेंसिक मिलान के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि परीक्षा परिणाम से जुड़े रिकॉर्ड में किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई थी या नहीं.

सीआईडी के निर्देश के अनुसार, अभ्यर्थियों को 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 के बीच पेपर-1 और पेपर-2 की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी की फोटो या पीडीएफ भेजनी होगी. इसके लिए व्हाट्सएप नंबर 9934309058 और ईमेल complainjpsc-cid@jhpolice.gov.in जारी किया गया है. जिन अभ्यर्थियों के पास कार्बन कॉपी उपलब्ध नहीं है, उनसे अपना रोल नंबर और उसके उपलब्ध नहीं होने का कारण लिखित रूप में भेजने को कहा गया है.
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जांच एजेंसी का मानना है कि अभ्यर्थियों के पास मौजूद कार्बन कॉपी और आयोग के रिकॉर्ड में सुरक्षित मूल ओएमआर शीट के फॉरेंसिक मिलान से यह स्पष्ट हो सकेगा कि उत्तरों या अंकों में किसी प्रकार की कथित हेराफेरी या डेटा टेंपरिंग हुई थी या नहीं.
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को ठेका मिलने पर भी जांच
सीआईडी की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को दिया गया ठेका भी है. जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि कथित रूप से ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद एजेंसी को परीक्षा का जिम्मा कैसे सौंपा गया, उसका भौतिक सत्यापन क्यों नहीं कराया गया और क्या इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई.
इसी मामले में जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, एजेंसी के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी तथा दो तकनीकी कर्मियों की रिमांड अदालत ने दो दिन और बढ़ा दी है. वहीं, पहले से गिरफ्तार तीन अन्य कर्मचारियों से भी आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है.
पूर्व अध्यक्ष से लगातार पूछताछ
जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एल. ख्यांग्ते से लगातार दूसरे दिन भी कई घंटे तक पूछताछ की गई. सीआईडी ने उन्हें 31 जुलाई को फिर उपस्थित होने का निर्देश दिया है. एजेंसी उनके विदेश दौरों और आर्थिक लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है. इसी क्रम में उनका पासपोर्ट भी जब्त किया गया है.
मूल्यांकन व्यवस्था पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान आयोग की उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन प्रणाली भी चर्चा में है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल में एक परीक्षक द्वारा प्रतिदिन जांची जाने वाली उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या 25 से बढ़ाकर 50 कर दी गई थी.
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक होती है, जिसमें प्रत्येक उत्तर का अलग-अलग मूल्यांकन करना पड़ता है. ऐसे में प्रतिदिन बड़ी संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने से गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस निर्णय के पीछे कोई शैक्षणिक या प्रशासनिक आधार था, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए.
जेएमएम ने अभ्यर्थियों से सहयोग की अपील की
इस बीच, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों से सीआईडी जांच में सहयोग करने की अपील की है. पार्टी ने कहा है कि जिन अभ्यर्थियों के पास ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध है, वे उसे जांच एजेंसी को भेजें. वहीं, जिनके पास यह उपलब्ध नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना विवरण साझा करें. पार्टी ने दावा किया है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी.
सभी अभ्यर्थियों से अपील है आरोपियों को काल कोठरी में भेजने में CID की जल्द से जल्द मदद करें।
सभी अभ्यर्थियों से अपील है दिए गए व्हाट्सएप नंबर और ईमेल पर जानकारी भेजें।
जांच एजेंसी के अनुसार जिन अभ्यर्थियों के पास कार्बन कॉपी उपलब्ध नहीं है, वे अपना रोल नंबर और उसके उपलब्ध नहीं… pic.twitter.com/XZstzpZQZx
— Jharkhand Mukti Morcha (@JmmJharkhand) July 30, 2026
आगे क्या?
अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण चरण अभ्यर्थियों की कार्बन कॉपी और सर्वर में उपलब्ध रिकॉर्ड का फॉरेंसिक मिलान होगा. यदि दोनों रिकॉर्ड में कोई अंतर मिलता है, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है. वहीं, यदि रिकॉर्ड पूरी तरह मेल खाते हैं, तो इससे कई सवालों के जवाब भी सामने आ सकते हैं. फिलहाल, जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सीआईडी की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा.
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