RANCHI : झारखंड में महिलाओं की सेहत को लेकर सामने आई ये रिपोर्ट किसी खतरे की घंटी नहीं बल्कि आने वाले भयावह संकट का संकेत मानी जा रही है. NFHS-6 के आंकड़े बता रहे हैं कि राज्य की हजारों महिलाएं अंदर ही अंदर ऐसी बीमारियों की तरफ बढ़ रही हैं, जो आने वाले वर्षों में पूरी पीढ़ी को कमजोर बना सकती हैं.
गांवों में कुपोषण महिलाओं के शरीर को खोखला कर रहा है, तो शहरों में मोटापा और खराब जीवनशैली नई बीमारियों को जन्म दे रही है. सबसे भयावह सच ये है कि अब इसका असर नवजात और बच्चों पर भी दिखने लगा है. कम वजन, कमजोरी और बढ़ती बीमारियां इस बात का संकेत हैं कि अगर हालात नहीं बदले, तो आने वाले समय में झारखंड एक बड़े स्वास्थ्य आपातकाल की तरफ बढ़ सकता है.
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झारखंड में महिलाओं की डिजिटल पहुंच दोगुनी, NFHS-6 रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
NFHS-6 रिपोर्ट बताती है कि झारखंड में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या में बड़ा उछाल आया है. NFHS-5 में जहां यह आंकड़ा 31.4 प्रतिशत था, वहीं NFHS-6 में बढ़कर 68.6 प्रतिशत पहुंच गया. इसे महिलाओं में बढ़ती डिजिटल जागरूकता और तकनीक तक बेहतर पहुंच का संकेत माना जा रहा है.
महिला शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रगति दर्ज की गई है. 10 वर्ष या उससे अधिक की स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 39.5 तक पहुंच गया है. वहीं घरेलू फैसलों में भागीदारी करने वाली विवाहित महिलाओं की संख्या 92.9 प्रतिशत दर्ज की गई, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भी सुधार दिखा है. रिपोर्ट के मुताबिक 59 प्रतिशत माताएं कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच (ANC) करा रही हैं, जबकि 77.4 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में हो रहे हैं. इसके अलावा मासिक धर्म स्वच्छता अपनाने वाली युवतियों का प्रतिशत बढ़कर 81.1 हो गया है.
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NFHS-6 रिपोर्ट में झारखंड की स्वास्थ्य चुनौतियां उजागर, कुपोषण और मोटापे ने बढ़ाई चिंता
हालांकि रिपोर्ट में कुछ चिंताजनक आंकड़े भी सामने आए हैं. महिलाओं में कुपोषण की दर 29.2 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 32.1 प्रतिशत तक पहुंच गया. शहरी क्षेत्रों में 33 प्रतिशत महिलाएं मोटापे या अधिक वजन की समस्या से जूझ रही हैं. बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है. कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत बढ़कर 41.1 हो गया है. वहीं दस्त की दर 7.2 प्रतिशत से बढ़कर 10.3 प्रतिशत दर्ज की गई है. रिपोर्ट में पुरुषों में शराब सेवन का प्रतिशत 33.6 बताया गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पहुंच और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बावजूद पोषण और जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है, ताकि राज्य सामाजिक और स्वास्थ्य विकास के सभी मानकों पर बेहतर प्रदर्शन कर सके.
