RANCHI : चाईबासा. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिमी सिंहभूम जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि चाईबासा समेत पूरे राज्य में DMFT फंड का सही तरीके से उपयोग नहीं हो रहा है. खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाई गई इस व्यवस्था का लाभ जमीन पर लोगों तक नहीं पहुंच रहा है.

बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर उठाए सवाल
दो दिवसीय पश्चिमी सिंहभूम दौरे के दूसरे दिन सारंडा मंडल के बरायबुरु में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के उद्देश्य से DMFT फंड की व्यवस्था की गई थी. इसका मकसद शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना था. उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में चाईबासा जिले को DMFT मद में करीब 3,700 करोड़ रुपये मिले, लेकिन इसके बावजूद खदान क्षेत्रों की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं दिखाई देता.
मरांडी ने कहा कि हर वर्ष औसतन 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जिले को मिली. ऐसे में उम्मीद थी कि खदान क्षेत्रों के आसपास पांच से सात किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों की मूलभूत समस्याएं काफी हद तक दूर हो चुकी होंगी. लेकिन दो दिनों के दौरे के दौरान उन्हें कहीं भी उल्लेखनीय विकास नजर नहीं आया. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इस राशि का सही उपयोग हुआ होता तो आज क्षेत्र की तस्वीर अलग होती. उन्होंने कहा कि चाईबासा और सारंडा के जंगलों से निकलने वाला लौह अयस्क देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है. इसके बावजूद खनन प्रभावित गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के कारण इतनी बड़ी राशि का अपेक्षित लाभ लोगों तक नहीं पहुंच सका.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि लगभग 25 वर्ष पहले भी उन्होंने इस इलाके का दौरा किया था. उस समय पेयजल की गंभीर समस्या थी और लोग आयरन युक्त लाल पानी पीने को मजबूर थे. दुखद बात यह है कि 25 साल बाद भी स्थिति में बहुत अधिक बदलाव नहीं आया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अक्सर संसाधनों की कमी का हवाला देती रही, इसलिए केंद्र सरकार ने DMFT फंड की व्यवस्था की थी. इसके बावजूद सरकार इस फंड का प्रभावी उपयोग करने में विफल रही. उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं को जिला प्रशासन और राज्य सरकार के समक्ष उठाया जाएगा. साथ ही विधानसभा में भी इस मुद्दे को मजबूती से उठाया जाएगा. उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित लोगों के अधिकारों और क्षेत्र के विकास के लिए वह हरसंभव प्रयास करेंगे.
