रांची : झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने राजस्व वसूली के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है. रांची बिजली सर्किल ने एक ही महीने में 170.74 करोड़ रुपये की वसूली कर अब तक का सर्वाधिक मासिक राजस्व अर्जित किया है. इस राशि में 66.56 करोड़ रुपये स्मार्ट मीटर से और 104.17 करोड़ रुपये पुराने बकाया की वसूली से प्राप्त हुए हैं.

बिजली विभाग इस उपलब्धि को स्मार्ट मीटर विस्तार, बकाया वसूली अभियान और बिजली चोरी के विरुद्ध कार्रवाई का परिणाम बता रहा है. हालांकि, दूसरी ओर उपभोक्ताओं का कहना है कि विभाग की आय तो बढ़ रही है, लेकिन बिजली बिल से जुड़ी समस्याएं पहले की तरह बनी हुई हैं. गलत बिल, पुराने बकाए, श्रेणी परिवर्तन और शिकायतों के समाधान में देरी जैसे मुद्दों को लेकर लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है.
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रांची बिजली सर्किल ने बनाया रिकॉर्ड
जेबीवीएनएल के अनुसार, रांची बिजली सर्किल ने जून महीने में 170.74 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया. इसमें 66.56 करोड़ रुपये स्मार्ट मीटर के माध्यम से प्राप्त हुए, जबकि 104.17 करोड़ रुपये बकाया वसूली से आए. रांची बिजली सर्किल के अंतर्गत रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जिले आते हैं. रांची ईस्ट डिवीजन : 16.58 करोड़ रुपये,रांची वेस्ट डिवीजन : 15.92 करोड़ रुपये, डोरंडा डिवीजन : 15.36 करोड़ रुपये,न्यू कैपिटल डिवीजन : 14.93 करोड़ रुपये, कोकर डिवीजन : 14.37 करोड़ रुपये
विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर से नियमित भुगतान, बकाया वसूली और बिजली चोरी के खिलाफ अभियान के कारण राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.
राजस्व बढ़ा, लेकिन शिकायतें भी कम नहीं हुईं
राजस्व में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बावजूद बिजली उपभोक्ताओं की समस्याएं कम नहीं हुई हैं. राज्य के विभिन्न जिलों से लगातार ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें उपभोक्ताओं को वास्तविक खपत की तुलना में कई गुना अधिक बिजली बिल भेजे गए.
सबसे चर्चित मामलों में एक उपभोक्ता को 27.48 करोड़ रुपये का बिजली बिल जारी कर दिया गया. इसके अलावा भी हजारों और लाखों रुपये के गलत बिल मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं. बाद में विभाग ने कई मामलों में इन्हें तकनीकी त्रुटि या डाटा संबंधी समस्या बताया, लेकिन इससे उपभोक्ताओं की परेशानी कम नहीं हुई.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिलिंग प्रणाली पूरी तरह डिजिटल है, तो इतनी बड़ी त्रुटियां नहीं होनी चाहिए. ऐसी घटनाएं बिलिंग प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं.
स्मार्ट मीटर पर भी उठ रहे सवाल
राज्य सरकार और बिजली विभाग ने स्मार्ट मीटर को पारदर्शी और आधुनिक व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया था. इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी देना और बिलिंग प्रक्रिया को सरल बनाना था.
हालांकि, कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद उनके खातों में अचानक वर्षों पुराने बकाए जोड़ दिए गए। कुछ लोगों का कहना है कि जिन बिलों का भुगतान पहले ही किया जा चुका था, वही राशि दोबारा बकाया के रूप में दिखाई देने लगी. प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपयोग करने वाले कई उपभोक्ताओं का कहना है कि रिचार्ज करने के बाद भी पूरी राशि पुराने बकाए में समायोजित हो जाती है, जिससे बिजली उपयोग के लिए पर्याप्त बैलेंस नहीं बचता.
ग्रामीण से शहरी श्रेणी में बदले गए कनेक्शन
कुछ क्षेत्रों से यह शिकायत भी सामने आई है कि बिना पूर्व सूचना के बिजली कनेक्शनों की श्रेणी बदल दी गई. कई ग्रामीण उपभोक्ताओं का आरोप है कि उनके कनेक्शन को ग्रामीण श्रेणी से शहरी (डीएस-2 अर्बन) श्रेणी में परिवर्तित कर दिया गया, जिससे बिजली की दर बढ़ गई और मासिक बिल पहले की तुलना में काफी अधिक आने लगा. उपभोक्ताओं का कहना है कि न तो उनके क्षेत्र की स्थिति बदली और न ही बिजली की खपत, फिर भी बिल में अचानक वृद्धि हो गई.
ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद दफ्तरों के चक्कर
बिजली विभाग डिजिटल और पेपरलेस व्यवस्था का दावा करता है, लेकिन बिल संबंधी विवाद होने पर उपभोक्ताओं को आज भी बिजली कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि उनसे वर्षों पुराने बिजली बिल और भुगतान की रसीदें मांगी जाती हैं. इसके कारण उन्हें लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है और समस्या के समाधान में कई दिन लग जाते हैं.
उपभोक्ता सवाल उठा रहे हैं कि यदि विभाग का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल प्रणाली में उपलब्ध है, तो पुराने कागजी दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है.
शिकायतों के आंकड़े भी बढ़ी चिंता का संकेत
बिलिंग संबंधी शिकायतों की संख्या भी कम नहीं है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केवल जून महीने में ही रांची बिजली सर्किल में हजारों शिकायतें दर्ज हुईं. 18 जून तक लगभग 31 हजार शिकायतें दर्ज हुईं. 19 जून तक करीब 17 हजार मामलों का निपटारा किया गया. 21 जून तक लगभग 28 हजार शिकायतों के समाधान का दावा किया गया.26 जून तक लगभग 30 हजार शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 23 हजार से अधिक मामलों के निस्तारण की जानकारी विभाग ने दी.
हालांकि, लगातार बड़ी संख्या में शिकायतों का दर्ज होना यह संकेत देता है कि बिलिंग प्रणाली और उपभोक्ता सेवा में अभी भी व्यापक सुधार की आवश्यकता है.
सबसे बड़ा सवाल
जेबीवीएनएल की रिकॉर्ड राजस्व वसूली यह दिखाती है कि विभाग की आय बढ़ रही है और बकाया वसूली अभियान प्रभावी रहा है. लेकिन दूसरी ओर, गलत बिल, पुराने बकाए, स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतें और बिल सुधार की जटिल प्रक्रिया उपभोक्ताओं के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. किसी भी सार्वजनिक सेवा की सफलता केवल राजस्व बढ़ने से नहीं आंकी जाती, बल्कि इस बात से तय होती है कि वह नागरिकों को कितनी पारदर्शी, विश्वसनीय और सुगम सेवा उपलब्ध करा रही है.
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