Ranchi : झारखंड की धरती से एक ऐसी खबर निकली कर आ रही है, जिसने विज्ञान और तकनीक की दुनिया में नई उम्मीद जगा दी है. कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के पीजी प्राणीशास्त्र विभाग के डॉ. शोभित रंजन और उनकी टीम ने एक AI आधारित ब्लड शुगर टेस्ट डिवाइस तैयार किया है. इस खास रिसर्च को अब भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिजाइन पेटेंट भी मिल गया है.यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि सीमित संसाधनों के बीच रहकर टीम ने ऐसा इनोवेशन तैयार किया, जो भविष्य में डायबिटीज जांच को आसान और आधुनिक बना सकता है.
डॉ. शोभित रंजन की टीम का कहना है कि AI तकनीक की मदद से हेल्थ सेक्टर में तेजी से बदलाव लाया जा सकता है. उनका यह शोध आने वाले समय में मेडिकल साइंस के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है.विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी इस सफलता को प्रेरणा बताया है. लोगों का कहना है कि अगर अवसर और संसाधन मिले, तो झारखंड के युवा दुनिया में बड़ा नाम कर सकते हैं.
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इस उपलब्धि के पीछे रही इन लोगों की मेहनत
अब झारखंड सिर्फ खनिज संपदा ही नहीं… बल्कि रिसर्च और टेक्नोलॉजी में भी अपनी पहचान बना रहा है.चाईबासा के शोधकर्ताओं ने AI आधारित ब्लड शुगर टेस्ट डिवाइस बनाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस डिवाइस को डिजाइन पेटेंट प्रदान किया है. यह प्रमाणपत्र डिजाइन एक्ट, 2000 और डिजाइन नियमावली 2001 के तहत जारी किया गया है।इस शानदार रिसर्च में डॉ. बेन सुजीथा बी, डॉ. शोभित रंजन, चंद्रकांत हट्टी, शनमुघा प्रिया आर. के., आर. एस. आर. थेनमोझी, राहुल वर्मा, रमेश दहल और डॉ. लोकेन्द्र बहादुर कठायत ने अहम योगदान दिया.
AI तकनीक पर आधारित यह डिवाइस ब्लड शुगर जांच को ज्यादा स्मार्ट, आसान और सटीक बना सकती है. हेल्थ टेक्नोलॉजी सेक्टर में इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।इस सफलता के बाद शोधकर्ताओं की टीम को लगातार बधाइयां मिल रही हैं.
कुलपति बोले- कोल्हान विश्वविद्यालय के लिए यह बड़ी उपलब्धि
कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने AI आधारित ब्लड शुगर टेस्ट डिवाइस को पेटेंट मिलने पर डॉ. शोभित रंजन और उनकी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं.उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए बेहद प्रेरणादायक है. इस सफलता से विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को नई दिशा मिलेगी.कुलपति ने कहा कि इस तरह के इनोवेशन न केवल शिक्षा जगत को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी उपयोगी साबित होते हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय के शोधकर्ता इसी तरह नई उपलब्धियां हासिल करेंगे.
डॉ. शोभित रंजन बोले- AI तकनीक वाली डिवाइस ज्यादा प्रभावी
AI आधारित ब्लड शुगर टेस्ट डिवाइस को डिजाइन पेटेंट मिलने पर डॉ. शोभित रंजन और उनकी टीम ने खुशी जाहिर की है.उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनकी टीम की सफलता नहीं, बल्कि शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की बड़ी प्रेरणा है. डॉ. रंजन के अनुसार, यह उपलब्धि भविष्य में समाजोपयोगी तकनीकों के विकास और अनुसंधान कार्यों को नई दिशा प्रदान करेगी।उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और रिसर्च के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर और प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं. टीम ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इस तरह के और भी उपयोगी नवाचार सामने आएंगे.

2013 से ब्लड शुगर तकनीक पर काम कर रहे हैं वैज्ञानिक
AI आधारित ब्लड शुगर टेस्ट डिवाइस विकसित करने वाले डॉ. शोभित रंजन ने बताया कि वे साल 2013 से डायबिटीज पर लगातार रिसर्च कर रहे हैं.उन्होंने अपनी बीएससी और एमएससी की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूरी की. इसके बाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पीएचडी हासिल की. अकादमिक क्षेत्र में अनुभव प्राप्त करते हुए उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी में करीब चार से पांच वर्षों तक असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया.
डॉ. शोभित रंजन के अनुसार, देश और विदेश में आयोजित विभिन्न कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के दौरान उनकी टीम ने इस AI आधारित ब्लड शुगर टेस्ट डिवाइस की परिकल्पना की थी.उन्होंने कहा कि लंबे समय तक किए गए शोध और अनुभव के आधार पर यह तकनीक विकसित की गई है, जो भविष्य में हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकती है.
रिसर्च टीम ने 2024-25 में किया था पेटेंट के लिए अप्लाई
डॉ. शोभित रंजन ने बताया कि इस डिवाइस के डिजाइन पेटेंट के लिए वर्ष 2024-25 में आवेदन किया गया था, जिसे अब भारत सरकार की ओर से मंजूरी प्रदान कर दी गई है।कमर्शियलाइजेशन के संबंध में उन्होंने कहा कि अब हेल्थकेयर सेक्टर की कोई भी कंपनी इस डिजाइन को लेकर इसका मैन्युफैक्चरिंग कर सकती है.उन्होंने स्पष्ट किया कि डिवाइस की कीमत बनाने वाली कंपनी की क्षमता पर निर्भर करेगी, लेकिन बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए इसकी लागत को मौजूदा डिवाइस से कम रखने का लक्ष्य है.
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