रांची : झारखंड के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अधिकारियों के कार्य व्यवहार पर एक बार फिर गंभीर नाराजगी जताई है. उन्होंने इस संबंध में मंत्रिमंडल एवं समन्वय विभाग के अपर मुख्य सचिव और झारखंड विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अधिकारियों के रवैये पर चिंता व्यक्त की है. मंत्री जी का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा होती रही तो इसका असर राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ लोकतांत्रिक प्रणाली पर भी पड़ेगा.

पत्रों का जवाब नहीं, फोन भी नहीं उठाते अधिकारी
अपने पत्र में वित्त मंत्री ने कहा है कि कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों की ओर से भेजे गए पत्रों का समय पर उत्तर नहीं देते. कई मामलों में अधिकारी फोन कॉल का जवाब भी नहीं देते, जबकि कुछ अधिकारी अपना मोबाइल फोन बंद कर लेते हैं. मंत्री ने कहा कि इस तरह का व्यवहार सरकारी सेवा की भावना के अनुरूप नहीं है और इससे अधिकारियों के भीतर अहंकार की झलक दिखाई देती है.
2021 के निर्देशों का कराया स्मरण
राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में वर्ष 2021 में जारी सरकारी निर्देशों का भी उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि 18 जनवरी 2021 और 28 जून 2021 को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग की ओर से सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के पत्रों का समयबद्ध उत्तर दिया जाए तथा उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए. मंत्री जी का कहना है कि इन निर्देशों के बावजूद लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कई अधिकारी न तो पत्रों को गंभीरता से लेते हैं और न ही जनप्रतिनिधियों से संवाद करने में आवश्यक शिष्टाचार का पालन करते हैं.
सरकार जवाबदेह प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध
वित्त मंत्री ने अपने पत्र में कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है. ऐसे में अधिकारियों द्वारा सरकार के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी चिंता का विषय है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी शिष्टाचार संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बना रहे.
विधायिका और कार्यपालिका के संबंधों पर जताई चिंता
राधाकृष्ण किशोर ने पत्र में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अधिकारियों का यही रवैया जारी रहा तो विधायिका और कार्यपालिका के बीच दूरी बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच संवाद और सहयोग बेहद आवश्यक है. मंत्री जी ने यह भी उल्लेख किया कि मुख्य सचिव स्तर से निर्देश जारी होने के बावजूद कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों से फोन पर भी अपेक्षित शिष्टाचार के साथ बात नहीं करते.
पहले भी उठा चुके हैं मुद्दा
गौरतलब है कि हाल के दिनों में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर भी राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष सवाल उठाए थे. अब अधिकारियों के व्यवहार को लेकर लिखे गए इस पत्र ने प्रशासनिक कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय को लेकर नई बहस छेड़ दी ह.
राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र के अंत में कहा है कि यदि समय रहते इस स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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