Ranchi : झारखंड में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों के प्रतिनिधित्व को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी निशा उरांव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट साझा करते हुए कई सवाल उठाए हैं.उन्होंने लिखा कि झारखंड विधानसभा की 81 सीटों में से 28 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं. इनमें से 8 सीटों पर ईसाई आदिवासी उम्मीदवारों को जीत मिली है.निशा उरांव के अनुसार, राज्य में ईसाई आदिवासियों की आबादी लगभग 4.3 प्रतिशत है, लेकिन उनके पास करीब 29 प्रतिशत आदिवासी सीटों का प्रतिनिधित्व है.
उन्होंने परिसीमन के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों में संभावित कमी को लेकर चिंता जताई जा रही है, लेकिन सरना समुदाय के प्रतिनिधित्व में कमी को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही है.उनकी इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है.
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आरएसएस ने विचार रखने के लिए दिया खुला मंच
भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी निशा उरांव ने कहा है कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से अपने मंच पर खुलकर बोलने की आजादी दी गई।उन्होंने कहा कि सरना समाज से जुड़े अहम मुद्दों पर उन्हें वैचारिक समर्थन भी मिला. निशा उरांव के अनुसार, उन्होंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया कि उन पर किसी विशेष विचारधारा को थोपने की कोशिश की गई हो.
उन्होंने कहा कि उन्हें जैसी हैं, वैसे ही स्वीकार किया गया और अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया।निशा उरांव का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है.
कभी किसी मिशनरी संस्था ने नहीं बुलाया – निशा उरांव
IRS अधिकारी निशा उरांव ने कहा कि उन्हें किसी भी मिशनरी संस्थान की ओर से न तो किसी सामाजिक मंच पर आमंत्रित किया गया और न ही अपनी बात रखने की स्वतंत्रता दी गई.उन्होंने कहा कि वे वर्ष 2014 से रांची में पदस्थापित हैं और लगातार समाज से जुड़े मुद्दों तथा अधिकारों पर काम करने की कोशिश कर रही हैं.निशा उरांव के अनुसार, वे सामाजिक विषयों पर चर्चा और कार्य करने के लिए हमेशा अवसर की तलाश में रही हैं, लेकिन मिशनरी संस्थानों की ओर से उन्हें कभी मंच नहीं मिला।उनका यह बयान अब सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है.
क्या सुरक्षित हैं सरना आदिवासियों के अधिकार
IRS अधिकारी निशा उरांव ने आदिवासी समाज से जुड़े कई अहम मुद्दों को लेकर अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि आदिवासी पहचान को आखिर किससे खतरा है.उन्होंने अवैध धर्मांतरण, सरना आदिवासियों की डीलिस्टिंग, आरक्षण के अधिकार, आदिवासी जमीन की सुरक्षा और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा की जरूरत बताई.
निशा उरांव ने कहा कि सरना आदिवासियों को डीलिस्टिंग से क्या लाभ मिलेगा, आदिवासियों का आरक्षण कैसे सुरक्षित रहेगा और राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व कितना मजबूत है .इन सभी विषयों पर गंभीर बहस होनी चाहिए।उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इन मुद्दों पर खुलकर बात करने की आजादी क्यों नहीं है। उनके अनुसार, समाज और नीति निर्माण के स्तर पर इन विषयों पर चर्चा जरूरी है.
परिसीमन के बाद भी आदिवासी अधिकार बचाए जा सकते हैं
IRS अधिकारी निशा उरांव ने परिसीमन और आदिवासी प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा कि यदि परिसीमन के बाद आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या घटती भी है, तब भी राजनीतिक दल सामान्य सीटों से आदिवासी उम्मीदवारों को टिकट दे सकते हैं.उन्होंने कहा कि योग्य उम्मीदवार सामान्य सीटों से चुनाव जीतने की क्षमता रखते हैं और इससे आदिवासी प्रतिनिधित्व भी बरकरार रह सकता है.
निशा उरांव के अनुसार, झारखंड में इसके दो सफल उदाहरण पहले से मौजूद हैं, जहां सामान्य सीटों से आदिवासी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।उन्होंने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और सही रणनीति के जरिए प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखा जा सकता है.
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