RANCHI : राज्य सरकार ने राजधानी रांची में करीब 550 करोड़ रुपये की लागत से 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तैयार किया है. अस्पताल के संचालन और व्यवस्था पर हर महीने करीब तीन करोड़ रुपये खर्च होने का दावा है. लेकिन इतने बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों को बुनियादी सुविधाएं समय पर मिल रही हैं या नहीं, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

ऐसा ही एक मामला रांची के सदर अस्पताल के सर्जरी वार्ड से सामने आया, जहां ठंड से कांप रहे एक मरीज को समय पर कंबल नहीं मिल सका. बताया गया कि मरीज की मां कंबल के लिए बार-बार नर्सिंग डेस्क के चक्कर लगाती रही, लेकिन उसे इंतजार करने को कहा गया.
कंबल नहीं मिला तो मां ने चटाई से ढका
घटना करीब दो सप्ताह पहले की बताई जा रही है। मरीज ठंड से लगातार कांप रहा था. परिजन के मुताबिक, काफी देर तक कंबल नहीं मिलने पर उसकी मां ने वार्ड में फर्श पर पड़ी एक चटाई उठाई और बेटे को उससे ढक दिया. चटाई से भी जब मरीज की कंपकंपी नहीं रुकी, तो मां ने अपने बेटे को सीने से लगा लिया और उसी बेड पर उसके साथ लेट गई. बताया गया कि करीब आधे घंटे बाद मरीज को कंबल उपलब्ध कराया गया. इस दौरान मां लगातार अपने बेटे को ठंड से बचाने की कोशिश करती रही.
वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन का ‘डैमेज कंट्रोल’
घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया. इसके बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से एक दूसरा वीडियो जारी किया गया. इस वीडियो में एक अन्य मरीज यह कहते हुए दिखाई देता है कि उसे कंबल की जरूरत नहीं थी, क्योंकि वह अपना कंबल घर से लेकर आया था. अस्पताल प्रबंधन ने इस वीडियो के जरिए कंबल की कमी या मरीजों को कंबल नहीं मिलने से जुड़ी घटना से इनकार करने की कोशिश की.
हालांकि, मामले की पड़ताल में सामने आया कि जिस मरीज को ठंड में कंबल के लिए इंतजार करना पड़ा था, उसके मामले में शुरुआत में लापरवाही बरती गई थी। बाद में घटना सामने आने के बाद दूसरे मरीज का वीडियो जारी किया गया.
सवाल सिर्फ एक कंबल का नहीं
इस पूरे मामले ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और उनकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं. अगर अस्पताल में हर बेड के लिए कंबल उपलब्ध होना जरूरी है, तो एक मरीज को ठंड से कांपते हुए करीब आधे घंटे तक इंतजार क्यों करना पड़ा? उसकी मां को बार-बार नर्सिंग डेस्क के चक्कर क्यों लगाने पड़े? और घटना सामने आने के बाद उसी मरीज की स्थिति स्पष्ट करने के बजाय दूसरे मरीज का वीडियो क्यों जारी किया गया?
करीब 550 करोड़ रुपये की लागत और हर महीने लगभग तीन करोड़ रुपये के संचालन खर्च वाले अस्पताल में यदि मरीज को कंबल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी इंतजार करना पड़े, तो यह सिर्फ व्यवस्था की कमी नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी सवाल है.
