Ranchi : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है. चुनाव से एक दिन पहले राज्य की राजनीति में हलचल अपने चरम पर है. एक ओर सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन अपने विधायकों की एकजुटता का दावा कर रहा है, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी मुकाबले को दिलचस्प बनाए हुए हैं. इस चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है। वहीं, एनडीए ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी का समर्थन किया है.

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विधानसभा का गणित क्या कहता है ?
झारखंड विधानसभा में महागठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है. इनमें जेएमएम, कांग्रेस, राजद और माले के विधायक शामिल हैं.दूसरी ओर, एनडीए के पास 24 विधायक हैं। ऐसे में सामान्य परिस्थितियों में महागठबंधन के दोनों उम्मीदवारों की जीत आसान मानी जा रही है.
लेकिन राजनीति में आंकड़े हमेशा अंतिम सच नहीं होते.यही वजह है कि परिमल नाथवानी की संभावित जीत को क्रॉस वोटिंग से जोड़कर देखा जा रहा है.
मॉक पोल में क्या हुआ ?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में इंडिया गठबंधन की बैठक हुई. बैठक में विधायकों को मतदान प्रक्रिया की जानकारी दी गई और मॉक पोल कराया गया.मॉक पोल में जेएमएम उम्मीदवार बैजनाथ राम को 29 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 27 वोट मिले. गठबंधन नेताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया में एक भी वोट अमान्य नहीं हुआ.
विधानसभा अध्यक्ष रबिंद्रनाथ महतो बैठक में शामिल नहीं हुए थे, लेकिन उन्होंने गठबंधन उम्मीदवारों के समर्थन की सहमति जताई. माले विधायक अरूप चटर्जी भी बैठक में मौजूद नहीं थे, हालांकि उनके समर्थन का दावा किया गया.
’56 नहीं, 61′ का क्या मतलब ?
चुनाव से पहले एक और नारे ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी।जेएमएम महासचिव विनोद पांडेय ने सोशल मीडिया पर लिखा – “56 नहीं, 61 जनाब. इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या महागठबंधन को विपक्षी खेमे से अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है या यह केवल आत्मविश्वास का प्रदर्शन है.हालांकि, इस दावे को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक रूप से कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई है.
रिसॉर्ट पॉलिटिक्स क्यों ?
चुनाव से पहले दोनों गठबंधनों ने अपने विधायकों को एक जगह ठहराने का फैसला किया है.एनडीए के विधायक रांची के होटल रेडिशन ब्लू में ठहरे हुए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह चुनावी तैयारी और प्रशिक्षण का हिस्सा है।वहीं कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को होटल बीएनआर में ठहराने की रणनीति बनाई है.भारतीय राजनीति में इस तरह की व्यवस्था को अक्सर ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ कहा जाता है, जिसका उद्देश्य संभावित टूट-फूट या संपर्क साधने की कोशिशों को रोकना माना जाता है.
चुनाव में एजेंटों की भूमिका
राज्यसभा चुनाव में पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।कांग्रेस ने के. राजू और सीरी बेला प्रसाद को पोलिंग एजेंट बनाया है, जबकि सांसद नासिर हुसैन काउंटिंग एजेंट होंगे. जेएमएम की ओर से विनोद पांडेय और सुदिव्य कुमार को जिम्मेदारी दी गई है. भाजपा ने अमर कुमार बाउरी को पोलिंग एजेंट और भानु प्रताप शाही को काउंटिंग एजेंट नियुक्त किया है.
अब आगे क्या ?
18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी. फिलहाल, विधानसभा का गणित महागठबंधन के पक्ष में दिखाई देता है. लेकिन क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं, विधायकों की होटल राजनीति और ’56 नहीं, 61′ जैसे नारों ने इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है.
अब निगाहें मतदान और मतगणना पर टिकी हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नतीजे आंकड़ों के मुताबिक आते हैं या झारखंड की राजनीति कोई नया मोड़ लेती है.
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