रांची : विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड की राजधानी रांची में इस बार आदिवासी संस्कृति, परंपरा और आधुनिक तकनीक का बड़ा संगम देखने को मिलेगा. राज्य सरकार 9 और 10 अगस्त 2026 को मोरहाबादी मैदान में झारखंड आदिवासी महोत्सव आयोजित करने जा रही है। दो दिवसीय आयोजन को दिशोम गुरु शिबू सोरेन की स्मृति को समर्पित किया जाएगा.

इस आयोजन की खास बात यह होगी कि इसे केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाएगा. आदिवासी कला, लोक परंपरा, हस्तशिल्प, खान-पान और जीवनशैली के साथ आधुनिक तकनीक को भी महोत्सव का हिस्सा बनाया जाएगा. राज्य सरकार की तैयारियों के मुताबिक, राजधानी रांची के अलावा राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में भी विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
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मोरहाबादी से बिरसा चौक तक निकलेगी आदिवासी जतरा
महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण मोरहाबादी मैदान से बिरसा चौक तक निकलने वाली भव्य आदिवासी जतरा होगी. इसमें बड़ी संख्या में कलाकार और प्रतिभागी शामिल होंगे. इस जतरा के जरिए झारखंड की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपरा और सामुदायिक जीवन की झलक लोगों के सामने रखने की तैयारी है. इसके साथ ही महोत्सव स्थल पर पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी.
5 हजार से अधिक कलाकार दे सकते हैं प्रस्तुति
आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से 5 हजार से अधिक आदिवासी कलाकार, लोक कलाकार और सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे. इसके जरिए अलग-अलग जनजातीय समुदायों की कला और सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाने की कोशिश होगी.महोत्सव में पारंपरिक नृत्य, संगीत, लोक कला और दूसरी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी.
100 स्टॉल का आदिवासी हाट-बाजार
महोत्सव परिसर में 100 स्टॉल वाला आदिवासी हाट-बाजार भी लगाया जाएगा. यहां झारखंड के पारंपरिक खान-पान से लेकर हस्तशिल्प और वन उत्पादों तक को प्रदर्शित किया जाएगा. इन स्टॉल पर लोगों को झारखंडी व्यंजन, पारंपरिक कलाकृतियां, हस्तशिल्प, हथकरघा और वन उत्पाद देखने और समझने का अवसर मिलेगा. शिल्पकारों की ओर से लाइव क्राफ्ट प्रदर्शन भी किए जाने की योजना है.
आयोजन से जुड़ी हालिया जानकारी के मुताबिक, स्टॉल के लिए सरकारी विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सहकारी समितियों, निजी संस्थानों और कला दलों से भी भागीदारी के लिए आवेदन मांगे गए हैं.
पहली बार ट्राइबल फिल्म फेस्टिवल और फैशन शो
इस बार महोत्सव में संस्कृति के साथ सिनेमा और फैशन को भी जगह दी जा रही है. ट्राइबल फिल्म फेस्टिवल और ट्राइबल फैशन शो आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होंगे. इसका उद्देश्य आदिवासी समाज की संस्कृति, वेशभूषा और जीवन से जुड़ी कहानियों को नए माध्यमों के जरिए लोगों तक पहुंचाना है. इसके अलावा युवाओं के लिए युवा संवाद, संगोष्ठी और फूड जोन जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी.
ड्रोन लाइट शो और डिजिटल तकनीक भी आकर्षण का केंद्र
महोत्सव में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी देखने को मिलेगा. इसके तहत ड्रोन लाइट शो, डिजिटल टनल, एआर-वीआर अनुभव केंद्र, इमर्सिव एक्सपीरियंस सेंटर, काइनेटिक एलईडी वीडियो वॉल, होलोग्राफिक फैन और इंटरैक्टिव फ्लोर प्रोजेक्शन जैसे आकर्षण शामिल किए जाएंगे. इसके अलावा डिजिटल मंच और एआई आधारित 3-डी चैटबॉट के जरिए भी लोगों को नया अनुभव देने की तैयारी है.
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जीवन और संघर्ष पर आधारित विशेष डिजिटल दृश्य और प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी. इस तरह आयोजक परंपरा और आधुनिक तकनीक को एक ही मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं.
शिबू सोरेन की स्मृति को समर्पित होगा महोत्सव
इस बार के आयोजन का एक भावनात्मक पक्ष भी है. महोत्सव को दिशोम गुरु शिबू सोरेन की स्मृति को समर्पित किया गया है. पिछले वर्ष उनके निधन के कारण विश्व आदिवासी दिवस का मुख्य आधिकारिक कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था. इसलिए इस वर्ष सरकार आयोजन को बड़े स्तर पर करने की तैयारी में है. रांची के साथ-साथ राज्य के जिला मुख्यालयों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित किए जाने की योजना है. दिल्ली में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की जानकारी सामने आई है.
क्यों खास है 9 अगस्त ?
9 अगस्त को दुनिया भर में विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है. यह दिन आदिवासी समुदायों की पहचान, अधिकार, संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
झारखंड में इस अवसर पर होने वाला महोत्सव राज्य की जनजातीय विरासत को सामने रखने का एक बड़ा मंच बनने जा रहा है. इस बार आयोजन में परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक और युवाओं की भागीदारी पर भी जोर दिया जा रहा है.
