LATEHAR : झारखंड के चर्चित चंदवा नक्सली हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ा खुलासा किया है. जांच में सामने आया है कि 22 नवंबर 2019 को लातेहार के चंदवा में चार पुलिसकर्मियों की हत्या की साजिश में शामिल लोगों को घटना के बाद पांच-पांच हजार रुपये का इनाम दिया गया था.
इसे भी पढ़ें : Jharkhand Weather Alert: रांची-धनबाद में बारिश और तेज हवा के आसार, पलामू-गढ़वा में गर्मी का कहर
यह हमला उस दिन हुआ था, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चुनावी सभा के लिए चंदवा पहुंचे थे. उनके कार्यक्रम के कुछ घंटों बाद ही नक्सलियों ने पुलिस पेट्रोलिंग टीम को निशाना बनाते हुए घात लगाकर हमला कर दिया था. इस हमले में चार पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी, जबकि एक जवान किसी तरह जान बचाने में सफल रहा था.
NIA की जांच के अनुसार, इस हमले की योजना पहले से तैयार की गई थी. हमले को सफल बनाने के लिए अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं. जांच में सामने आया है कि फगुना गंझू नाम की महिला को पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखने का काम सौंपा गया था. उसे पहले से बता दिया गया था कि उसी रात हमला होना है.
जांच एजेंसी के मुताबिक, फगुना गंझू सड़क किनारे झाड़ियों में छिपकर पुलिस वाहनों की आवाजाही पर नजर रख रही थी. जैसे ही पुलिस की गाड़ी घटनास्थल की ओर बढ़ी, उसने इसकी सूचना नक्सलियों तक पहुंचाई. इसके बाद नक्सलियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया.
इसे भी पढ़ें : झारखंड पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर, 2027 में मतदान की संभावित तारीख सामने आई

हमले के बाद फगुना गंझू को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया, जहां उसे पांच हजार रुपये का इनाम दिया गया. NIA का दावा है कि यह रकम उसे पुलिस की रेकी और सूचना देने के बदले दी गई थी.जांच में यह भी सामने आया है कि संगठन से जुड़े ओवर ग्राउंड वर्कर्स ने भी इस हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इनमें सुनील गंझू का नाम भी शामिल है.
NIA के अनुसार, सुनील गंझू ने हमलावरों को जंगल से घटनास्थल तक पहुंचाने और वारदात के बाद सुरक्षित निकालने में मदद की थी. उसे भी पांच हजार रुपये का इनाम दिया गया था.हमले में एएसआई शुक्रा उरांव, होमगार्ड जवान सिकेंद्र सिंह, शंभू प्रसाद और चालक यमुना प्रसाद की मौत हो गई थी.
हमलावर घटना के बाद पुलिसकर्मियों के हथियार भी अपने साथ ले गए थे. इनमें एक पिस्तौल, तीन 303 राइफल और बड़ी संख्या में कारतूस शामिल थे.NIA की जांच के अनुसार, घटना के बाद नक्सली एक निर्धारित स्थान पर इकट्ठा हुए थे. वहां संगठन के कमांडर रविंद्र गंझू ने हमले में शामिल लोगों और सहयोगियों को पांच-पांच हजार रुपये देकर पुरस्कृत किया था.
इसे भी पढ़ें : 23 साल से नौकरी कर रहे शिक्षकों पर संकट जेटेट 2026 का फॉर्म नहीं भर पा रहे बीएड शिक्षक
