Ranchi : देश का कोयला उद्योग अब बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम योजना को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत उन खदानों से गैस निकाली जाएगी, जहां कोयला काफी गहराई में होने की वजह से पारंपरिक खनन मुश्किल और महंगा हो चुका है. अब ऐसी खदानों में कोयले को सीधे निकालने के बजाय Coal Gasification तकनीक के जरिए गैस में बदला जाएगा.
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सरकार की तीन कंपनियां मिलकर शुरू करेंगी बड़ा प्रोजेक्ट
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए Coal India Limited ने तीन बड़ी सरकारी कंपनियों GAIL, BHEL और BPCL के साथ साझेदारी की है. एमओयू के बाद अब ज्वाइंट वेंचर के जरिए इस योजना पर काम शुरू हो चुका है. इस परियोजना को तेजी देने के लिए केंद्र सरकार ने 37,500 करोड़ रुपये की सहायता राशि मंजूर की है.
वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन गैसीकरण का लक्ष्य
सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य तय किया है. फिलहाल देश में कोयले का सबसे ज्यादा इस्तेमाल थर्मल पावर उत्पादन में होता है, लेकिन नई तकनीक के जरिए कोयले से बनने वाली गैस का उपयोग Methanol, Ammonia, रसायन और उर्वरक बनाने में किया जाएगा. इससे घरेलू बाजार में कोयले की मांग बढ़ने की उम्मीद है.
50 हजार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
अनुमान के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स के शुरू होने से करीब 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होंगे. वर्तमान में भारत अपनी जरूरतों के लिए विदेशों पर अत्यधिक निर्भर है. इस प्रोजेक्ट के सफल होने से इस निर्भरता में भारी कमी आएगी.देश में फर्टिलाइजर और केमिकल उद्योग के लिए ये सभी उत्पाद बेहद जरूरी हैं. घरेलू कोयले से गैस और ईंधन बनने के बाद भारत को महंगे आयात से मुक्ति मिलेगी, जिससे देश का राजकोषीय घाटा कम होगा और भारतीय रुपया मजबूत होगा.
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