रांची: झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में राजनीतिक समीकरणों को झकझोर देने वाला परिणाम सामने आया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा. 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए सभी विधायकों ने मतदान किया था. मतगणना के दौरान तीन मत अमान्य घोषित किए गए। इसके बाद वैध मतों की संख्या 78 रह गई.

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किसे कितने वोट मिले ?
मतगणना में सामने आए आंकड़ों के अनुसार—
- परिमल नाथवानी (एनडीए समर्थित निर्दलीय): 30 वोट
- बैजनाथ राम (झामुमो) : 29 वोट
- प्रणव झा (कांग्रेस) : 19 वोट
- अमान्य मत : 3
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए प्रथम वरीयता के 28 मतों की आवश्यकता थी. बैजनाथ राम और परिमल नाथवानी दोनों ने यह आंकड़ा पार कर लिया, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार आवश्यक समर्थन जुटाने में पीछे रह गए.
कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका
इंडिया गठबंधन के पास विधानसभा में बहुमत का दावा था और कांग्रेस अपने उम्मीदवार की जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रही थी. लेकिन नतीजों ने पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए.
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस उम्मीदवार को राजद के चार और माले के दो विधायकों का समर्थन नहीं मिला। यह भी कहा जा रहा है कि इन छह वोटों ने चुनावी तस्वीर बदल दी। हालांकि, संबंधित दलों की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने निर्णायक भूमिका निभाई.
परिमल नाथवानी की वापसी
इस जीत के साथ परिमल नाथवानी एक बार फिर राज्यसभा पहुंच गए हैं. इससे पहले वे 2008 और 2014 में झारखंड से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। वर्ष 2020 में वे आंध्र प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे थे.
2026 में एनडीए के समर्थन से झारखंड वापसी को उनकी बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है. विधानसभा में एनडीए के पास अपने दम पर पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद उनकी जीत ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा है.
बैजनाथ राम की जीत का संदेश
जेएमएम उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले बैजनाथ राम को राज्यसभा भेजकर जेएमएम ने दलित प्रतिनिधित्व को लेकर एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है. आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इसे पार्टी की व्यापक सामाजिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
गठबंधन की एकजुटता पर उठे सवाल
राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने इंडिया गठबंधन की आंतरिक एकजुटता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद राजनीतिक हलकों में सहयोगी दलों के रिश्तों और भविष्य की चुनावी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
वहीं, एनडीए के लिए यह परिणाम मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है। निर्दलीय उम्मीदवार को जीत दिलाकर उसने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह सीमित संख्या बल के बावजूद राजनीतिक परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ने की क्षमता रखता है.
विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संकेत
राज्यसभा चुनाव के नतीजे सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव का भविष्य तय नहीं करते, लेकिन वे राजनीतिक दलों की संगठनात्मक मजबूती, सहयोगी दलों के बीच भरोसे और चुनावी प्रबंधन की क्षमता का संकेत जरूर देते हैं.
झारखंड की राजनीति में 2026 का यह राज्यसभा चुनाव सिर्फ दो सांसदों के चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा. यह आने वाले दिनों में गठबंधन की राजनीति, सीट बंटवारे और चुनावी रणनीतियों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है.
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