रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से बनाए गए पुल-पुलियों के गिरने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए विभाग से जवाब तलब किया है. अदालत ने पूछा है कि अब तक राज्य में कितने पुल और पुलियां ध्वस्त हुई हैं और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है. यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की. यह जनहित याचिका पंकज कुमार यादव की ओर से दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पुल-पुलियों के गिरने के बावजूद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई.

इसे भी पढे : झारखंड राज्यसभा चुनाव: आधे से अधिक विधायकों ने डाला वोट,अब निगाहें शाम की मतगणना पर
शपथ पत्र दाखिल नहीं करने पर कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने ग्रामीण विकास विभाग के सचिव द्वारा शपथ पत्र दाखिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में विभागीय सचिव स्वयं विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करें. अदालत ने सचिव से यह भी बताने को कहा है कि राज्य में ग्रामीण विकास विभाग के तहत निर्मित कितने पुल-पुलिया गिरे हैं, इन घटनाओं के बाद किन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई और दोषियों पर क्या कदम उठाए गए.
चीफ इंजीनियर के शपथ पत्र पर भी सवाल
कोर्ट ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि सचिव की जगह विभाग के चीफ इंजीनियर की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया. खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जब फरवरी 2026 में स्पष्ट रूप से विभागीय सचिव को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, तो फिर चीफ इंजीनियर की ओर से शपथ पत्र क्यों प्रस्तुत किया गया.
अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया यह अदालत के आदेश की अवहेलना का मामला प्रतीत होता है और इसे अवमानना के रूप में भी देखा जा सकता है.
2 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित की गई है.अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ग्रामीण विकास विभाग अदालत के सामने क्या जवाब पेश करता है और पुल-पुलियों के गिरने के मामलों में जवाबदेही तय करने को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं.
इसे भी पढे : रांची के सिरांगो में क्रेशर ब्लास्टिंग के बाद हंगामा, ग्रामीणों ने घरों में दरार पड़ने का लगाया आरोप
