RANCHI : रांची पुलिस मुख्यालय-1 में तैनात Dy SP अमर कुमार पांडेय को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं. आदिवासी समन्वय समिति के संयोजक लक्ष्मी नारायण मुंडा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखित शिकायत देकर उनके कार्यकाल, जमीन से जुड़े मामलों में भूमिका और कथित संरक्षण की निष्पक्ष जांच की मांग की है. शिकायत पर मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से कार्रवाई के लिए पत्र गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को भेजा गया है.
शिकायत में अमर कुमार पांडेय पर आदिवासी जमीन से जुड़े मामलों में गैर-आदिवासी जमीन माफिया और दलालों के पक्ष में काम करने, संरक्षण देने तथा वसूली में संलिप्त होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र या विभागीय जांच में पुष्टि होना अभी बाकी है.

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि रांची के Dy SP मुख्यालय-1 के पद पर कार्यरत रहने के दौरान अमर कुमार पांडेय की भूमिका और उनकी संपत्ति की Vigilance, CID अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए. साथ ही जांच में दोषी पाए जाने पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है.
शुरुआत से ही भूमिका पर सवाल का दावा
शिकायत में कहा गया है कि जमीन से जुड़े मामलों की शुरुआती जांच में भी अमर कुमार पांडेय की भूमिका संदिग्ध रही. बाद में मामला CID को सौंपा गया और प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की ओर से भी संबंधित जमीन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई. शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर आम लोगों के बीच और सोशल मीडिया पर भी अमर कुमार पांडेय की कथित भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है. शिकायत में उन पर जमीन माफियाओं को संरक्षण देने और वसूली में शामिल होने तक के आरोप लगाए गए हैं.
हालांकि शिकायत में खुद यह भी कहा गया है कि इन आरोपों को लेकर कोई आधिकारिक आरोप-पत्र या विभागीय जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है और बातें मुख्य रूप से समाचार रिपोर्टों तथा सार्वजनिक चर्चाओं में सामने आती रही हैं.
कांकें इलाके की जमीन जांच का भी जिक्र
शिकायत में रांची के कांके अंचल क्षेत्र के बड़े जमीन घोटालों का भी उल्लेख किया गया है. इसमें आदिवासी और गैर-मजरुआ जमीन की प्रकृति बदलकर कथित अवैध लेन-देन किए जाने के आरोपों की ओर ध्यान दिलाया गया है. शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है, क्योंकि जमीन से जुड़े मामलों में यदि जांच करने वाले अधिकारियों पर ही मिलीभगत या संरक्षण के आरोप लगें, तो पूरी पुलिस व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा होता है.
लक्ष्मी नारायण मुंडा की शिकायत में अमर कुमार पांडेय पर अघोषित तौर पर आदिवासी विरोधी रवैया रखने और आदिवासियों की जमीन से जुड़े मामलों में गैर-आदिवासी जमीन माफिया और दलालों का पक्ष लेने का आरोप भी लगाया गया है. यह एक गंभीर आरोप है और इसकी सच्चाई केवल स्वतंत्र जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है. शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि अमर कुमार पांडेय के Dy SP मुख्यालय-1 के पद पर रहते हुए उनकी भूमिका और संपत्ति की जांच कराई जाए और जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या आपराधिक संलिप्तता सामने आती है तो कठोर कार्रवाई की जाए.

मुख्यमंत्री सचिवालय ने शिकायत को आगे बढ़ाया
मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायत सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुंची. 10 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर प्राप्त आवेदन पर नियमानुसार उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है. पत्र में यह भी कहा गया है कि की गई कार्रवाई से मुख्यमंत्री सचिवालय को अवगत कराया जाए.
अब निगाह इस बात पर है कि मुख्यमंत्री सचिवालय से भेजी गई शिकायत के बाद गृह विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या अमर कुमार पांडेय के खिलाफ लगाए गए आरोपों की कोई स्वतंत्र जांच शुरू होती है.
