RANCHI : मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल बालाघाट जिले में 30 आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर झारखंड प्रदेश आदिवासी कांग्रेस ने रांची में सत्याग्रह शुरू किया है. संगठन ने बच्चों की मौत को गंभीर मामला बताते हुए मध्य प्रदेश सरकार पर आदिवासी बहुल इलाकों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है. बताया गया है कि बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के बोंदारी, कुंडेकसा और कोरका समेत कई गांवों में 1 से 14 वर्ष की उम्र के 19 आदिवासी बच्चों की मौत हुई है. ये गांव जिला मुख्यालय से करीब 60 से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं.
बुनियादी सुविधाओं की कमी का आरोप
आदिवासी कांग्रेस का कहना है कि जिन गांवों में बच्चों की मौत हुई है, वहां सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता के कारण लोगों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है.
संगठन के मुताबिक, इन इलाकों में बच्चों के बीच कुपोषण की समस्या भी गंभीर है. कई परिवारों के सामने राशन की कमी की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल असर पड़ने की बात कही जा रही है.
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हैंडपंप से लाल पानी आने की शिकायत
आदिवासी कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ गांवों में हैंडपंप से लाल रंग का पानी निकलता है. इस पानी में आर्सेनिक होने की बात कही जा रही है. संगठन का कहना है कि दूषित पेयजल, कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसी परिस्थितियां बच्चों की मौत के पीछे अहम कारण हो सकती हैं.
हालांकि, बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत चिकित्सकीय और प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी.
रांची में सत्याग्रह के जरिए उठाया मुद्दा
बालाघाट में बच्चों की मौत के मुद्दे को लेकर झारखंड प्रदेश आदिवासी कांग्रेस ने रांची में सत्याग्रह शुरू कर मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ आवाज उठाई. संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है.
आदिवासी कांग्रेस ने मांग की है कि आदिवासी बहुल गांवों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जाए. इसके साथ ही स्वच्छ पेयजल, पोषण और राशन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार तत्काल कदम उठाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
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रिपोर्ट :विजय ठाकुर ,गोड्डा
