RANCHI : सरकारी अफसर बनने का सपना देखने वाले JPSC अभ्यर्थियों से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. CID की जांच में एक ऐसे कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जहां अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने के नाम पर लाखों रुपये लेने के साथ-साथ उनके जरूरी कागजात और हस्ताक्षर किए हुए चेक तक अपने पास रखने का आरोप है. इस पूरे मामले में अभय तिवारी को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है. आरोप है कि उसने अकेले यह पूरा खेल नहीं चलाया, बल्कि उसके साथ कई लोग जुड़े हुए थे. ये लोग अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे और उन्हें इस कथित नेटवर्क में लाने का काम करते थे.
पहले कागज अपने पास रखे, फिर बनाया दबाव
CID की जांच में सामने आया है कि कुछ अभ्यर्थियों से उनके 10वीं, 12वीं और डिग्री तक के ओरिजिनल सर्टिफिकेट अपने पास रखवाए गए. आरोप है कि ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि अगर अभ्यर्थी बाद में पैसे देने से मना करे, तो उसके दस्तावेजों के जरिए उस पर दबाव बनाया जा सके. यानी डर यह दिखाया जाता था कि अगर पैसे नहीं दिए, तो दस्तावेजों की वजह से आगे की प्रक्रिया में परेशानी खड़ी हो सकती है.
साइन किया हुआ चेक भी रखवाने का आरोप
मामले में अभ्यर्थियों से साइन किए हुए कैंसिल चेक लेने की बात भी सामने आई है. आरोप है कि इन चेक का इस्तेमाल अभ्यर्थियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा सकता था. यानी अगर पैसे नहीं मिले तो चेक और उससे जुड़ी कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया जा सके.
खाली कागज पर भी साइन कराने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप खाली कागज और स्टांप पेपर से जुड़ा है. जांच के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों से खाली स्टांप पेपर और साइन किए हुए ब्लैंक A-4 पेपर भी लिए गए. आरोप है कि बाद में इन कागजों का इस्तेमाल किसी भी तरह का एग्रीमेंट या कर्ज का कागज दिखाकर अभ्यर्थियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा सकता था. यानी पूरा खेल सिर्फ पैसे लेने तक सीमित नहीं था. आरोप है कि अभ्यर्थियों को इस तरह फंसाया जाता था कि वे बाद में आसानी से इस नेटवर्क से बाहर भी न निकल सकें.
24 छात्रों का मामला सामने आया
CID की जांच में अब तक 24 अभ्यर्थियों के साथ ऐसे एग्रीमेंट होने की बात सामने आई है. इनसे सर्टिफिकेट, चेक और खाली कागज रखवाने का दावा किया गया है. इनमें से 11 अभ्यर्थियों से 10-10 लाख रुपये लिए जाने की बात जांच में सामने आई है. यानी 11 लोगों से कुल 1 करोड़ 10 लाख रुपये लिए जाने का मामला सामने आया है. कुछ अन्य अभ्यर्थियों के दस्तावेज बाद में वापस किए जाने की बात भी सामने आई है.
100 से ज्यादा छात्रों तक पहुंच सकती है जांच
अब CID की जांच सिर्फ इन 24 अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है. जांच में 100 से ज्यादा ऐसे अभ्यर्थियों का भी जिक्र सामने आया है, जिन्हें कथित तौर पर JPSC PT पास कराने के नाम पर इस नेटवर्क से जोड़ा गया था. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे खेल में कितने लोग शामिल थे और कितने अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए.
युवाओं के भविष्य पर बड़ा सवाल
JPSC की तैयारी करने वाले छात्र सालों तक मेहनत करते हैं. कई छात्र परिवार से पैसे लेकर कोचिंग करते हैं और अपनी पूरी पढ़ाई इस उम्मीद में लगाते हैं कि एक दिन सरकारी अधिकारी बनेंगे. ऐसे में अगर परीक्षा पास कराने के नाम पर उनसे लाखों रुपये मांगे जाएं और फिर उनके कागजात और चेक रखकर दबाव बनाया जाए, तो यह बेहद गंभीर मामला है. हालांकि, CID की जांच में सामने आए आरोपों पर अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही साफ होगी. फिलहाल CID इस कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों और पैसों के लेन-देन की जांच कर रही है. सवाल सिर्फ JPSC का नहीं है. सवाल उन हजारों छात्रों के भरोसे का है, जो सरकारी नौकरी पाने के लिए सालों मेहनत करते हैं. आखिर कब तक ऐसे कथित सिंडिकेट युवाओं के सपनों को अपना कमाई का जरिया बनाते रहेंगे?
