DHANBAD : क्या कोई इंसान आधुनिक दुनिया से दूर, घने जंगल में वर्षों तक अकेले रह सकता है. धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड से सामने आई एक कहानी यही सवाल खड़ा करती है. यहां कमलपुर जंगल में 75 वर्षीय सुरेंद्र सोरेन पिछले करीब 15 वर्षों से अकेले अपनी झोपड़ी में जीवन बिता रहे हैं.
इसे भी पढ़ें : रांची के लोअर बाजार में आधी रात चला विशेष पुलिस अभियान, अड्डेबाजी करने वालों को दी गई सख्त चेतावनी
बेटे की मौत के बाद जंगल को बना लिया आशियाना
जानकारी के मुताबिक बेटे के निधन के बाद सुरेंद्र सोरेन अपनी पत्नी के साथ जंगल में रहने आ गए थे. कुछ समय बाद उनकी पत्नी का भी देहांत हो गया. इसके बावजूद उन्होंने जंगल नहीं छोड़ा और तब से अकेले ही वहीं रह रहे हैं.
खेती, जंगल के फल और चूल्हे पर गुजर रहा जीवन
सुरेंद्र सोरेन अपनी जरूरत का चावल खुद की खेती से प्राप्त करते हैं. इसके अलावा जंगल से फल इकट्ठा करते हैं और लकड़ियां लाकर चूल्हे पर भोजन तैयार करते हैं. सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने आत्मनिर्भर जीवनशैली अपना ली है.
मीडिया में खबर आने के बाद हरकत में आया प्रशासन
जब सुरेंद्र सोरेन की कहानी सामने आई तो धनबाद जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया. उपायुक्त के निर्देश पर टुंडी के प्रखंड विकास पदाधिकारी अपनी टीम के साथ जंगल पहुंचे और उन्हें गांव लौटने के लिए समझाने का प्रयास किया.
गांव लौटने से किया इनकार, प्रशासन ने पहुंचाई राहत
काफी समझाने के बाद भी सुरेंद्र सोरेन अपने फैसले पर अडिग रहे और गांव लौटने से मना कर दिया. इसके बाद प्रशासन ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए जंगल में ही राहत सामग्री उपलब्ध कराई. उन्हें चावल, दाल, आटा, नमक समेत जरूरी राशन दिया गया. साथ ही बारिश से बचाव के लिए झोपड़ी की मरम्मत कराई गई और कपड़े, कंबल व अन्य जरूरी सामान भी उपलब्ध कराया गया.
इसे भी पढ़ें : संसद परिसर में बीजेपी का प्रदर्शन, झारखंड की भर्ती परीक्षाओं की CBI जांच की मांग
