RANCHI : गिरिडीह उपचुनाव की तैयारियों के बीच बीजेपी और सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है. बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल ने आरोप लगाया है कि JMM और कांग्रेस ने आदिवासियों को ‘बरगलाकर’ सत्ता हासिल की है. पटेल ने दावा किया कि आदिवासी समाज अब जाग चुका है और राज्य की मौजूदा सरकार से छुटकारा चाहता है. उन्होंने कहा कि बीजेपी अब आदिवासी बहुल इलाकों में सीधे लोगों के बीच जाएगी और गांव-गांव जाकर संवाद करेगी.

गजेंद्र सिंह पटेल के इस बयान के बाद JMM और कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार किया है. JMM के महासचिव विनोद पांडे ने कहा कि बीजेपी के प्रदेश प्रभारी को पहले झारखंड की ज़मीनी हकीकत समझनी चाहिए, जबकि कांग्रेस ने बीजेपी से उसके 11 वर्षों के शासन का रिपोर्ट कार्ड पेश करने की मांग की है.
रांची में बीजेपी की मैराथन बैठक, गिरिडीह पर रणनीति
6 अक्टूबर को रांची में बीजेपी की कोर कमेटी की मैराथन बैठक हुई. बैठक में प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, आदित्य साहू, अमर कुमार बाउरी और समीर उरांव समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. बैठक में गिरिडीह उपचुनाव की तैयारियों के साथ-साथ आदिवासी समाज के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई.
बीजेपी ने संकेत दिया है कि वह आदिवासी बहुल इलाकों में संगठन को और मजबूत करने के साथ-साथ बूथ स्तर तक जनसंपर्क अभियान चलाएगी.गजेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि बीजेपी आदिवासी समाज के बीच जाकर उनसे सीधे संवाद करेगी.पार्टी की योजना दुर्गापूजा के बाद गिरिडीह में कैंप करने और बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की है.
JMM-कांग्रेस ने आदिवासियों को बरगलाकर सरकार बनाई
गजेंद्र सिंह पटेल ने JMM और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों दलों ने आदिवासियों को बरगलाकर राज्य में सरकार बनाई है.उन्होंने राज्य में विकास की स्थिति पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और अपराध बढ़े हैं.पटेल ने बीजेपी को आदिवासी हितों की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार से लेकर मौजूदा बीजेपी सरकारों तक आदिवासी समाज के लिए कई काम किए गए हैं.
उन्होंने बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित किए जाने और एकलव्य आवासीय विद्यालयों की स्थापना को भी बीजेपी की उपलब्धियों के तौर पर गिनाया. बीजेपी प्रभारी ने कहा कि पार्टी अब इन योजनाओं और कार्यों को लेकर आदिवासी गांवों तक पहुंचेगी.
JMM का पलटवार-पहले झारखंड की ज़मीनी हकीकत समझें
बीजेपी के आरोपों पर JMM महासचिव विनोद पांडे ने पलटवार किया.उन्होंने कहा कि गजेंद्र सिंह पटेल को झारखंड की ज़मीनी हकीकत को समझने के बाद ही बयान देना चाहिए। उन्होंने बीजेपी पर ‘नफरत की राजनीति’ करने का आरोप लगाया.विनोद पांडे ने केंद्र सरकार से बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर भी सवाल किया. उन्होंने पूछा कि पश्चिम बंगाल और बिहार में घुसपैठ के खिलाफ केंद्र सरकार ने क्या कार्रवाई की है.
उन्होंने झारखंड के खनिज राजस्व से जुड़े बकाये का भुगतान करने की भी मांग की. JMM नेता ने राज्य सरकार की योजनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि ‘मंईयां सम्मान योजना’ और ‘अबुआ आवास योजना’ जैसी योजनाओं से राज्य की जनता और आदिवासी समाज को लाभ मिल रहा है.
कांग्रेस ने भी बीजेपी से मांगा 11 साल का रिपोर्ट कार्ड
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भी गजेंद्र सिंह पटेल के बयान पर प्रतिक्रिया दी.उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास बताने के लिए अपना कोई काम नहीं है और इसलिए वह विपक्षी दलों पर आरोप लगा रही है.राकेश सिन्हा ने बीजेपी से उसके 11 वर्षों के शासन का रिपोर्ट कार्ड पेश करने को कहा.उन्होंने दावा किया कि आदिवासी समाज अब बीजेपी के ‘बहकावे’ में आने वाला नहीं है.
7 अक्टूबर से गिरिडीह में बीजेपी का अभियान
बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक के अगले ही दिन गिरिडीह में पार्टी का कार्यक्रम हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बीजेपी ने गिरिडीह के झंडा मैदान में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया. कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन, सेवा और सुशासन को जनता तक पहुंचाना बताया गया.
हालांकि, कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं की मौजूदगी और विशाल ‘मशाल जुलूस’ ने इसे राजनीतिक रूप से भी अहम बना दिया.कार्यक्रम में बाबूलाल मरांडी, रवींद्र राय और रंजीत राय समेत बीजेपी के कई नेता मौजूद रहे. बीजेपी ने ‘I Will Do It’ के संकल्प के साथ गिरिडीह में अपनी चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया.
आदिवासी वोटों पर दोनों दलों की नजर
गिरिडीह उपचुनाव की औपचारिक तस्वीर भले अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई हो, लेकिन बीजेपी और JMM के बीच राजनीतिक मुकाबले के संकेत मिलने लगे हैं बीजेपी की रणनीति आदिवासी बहुल इलाकों में संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर पर जनसंपर्क बढ़ाने की है। वहीं, JMM सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं को जनता के बीच अपनी उपलब्धियों के तौर पर पेश कर रही है.
ऐसे में आने वाले दिनों में ‘आदिवासी अस्मिता’, विकास और कल्याणकारी योजनाएं गिरिडीह उपचुनाव की राजनीति के प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं. अब सवाल यह है कि बीजेपी का ‘आदिवासी संवाद’ अभियान कितना असर डालता है और JMM का ‘मंईयां सम्मान’ जैसे योजनाओं पर जोर कितना राजनीतिक लाभ दिलाता है.गिरिडीह उपचुनाव से पहले दोनों दलों की यह राजनीतिक लड़ाई आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है.
