RANCHI : झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्सुकता चरम पर है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद उम्मीदवारों के नाम पर बना सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. नामांकन प्रक्रिया के तीसरे दिन भी किसी भी दल या संभावित उम्मीदवार ने पर्चा नहीं खरीदा, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया है.
इसे भी पढ़े : मालवीय नगर में आग का तांडव, रेस्टोरेंट हादसे में 21 लोगों की मौत

राज्यसभा सीट पर झामुमो के फैसले का इंतजार कर रही कांग्रेस
दरअसल, राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है। सत्ता पक्ष महागठबंधन के पास संख्या बल इतना है कि वह दोनों सीटें जीत सकता है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि दूसरी सीट पर उम्मीदवार कौन होगा. कांग्रेस लगातार एक सीट पर दावा ठोक रही है, जबकि झामुमो अभी तक अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं दिख रहा. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष अपनी दावेदारी रख दी है. झारखंड प्रभारी के. राजू और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर गठबंधन के तहत एक सीट कांग्रेस को देने की मांग की थी. बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं ने सकारात्मक संकेत मिलने की बात कही, लेकिन अंतिम फैसला झामुमो नेतृत्व पर छोड़ दिया गया.
यही वजह है कि कांग्रेस फिलहाल इंतजार की मुद्रा में है. पार्टी अपने उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला तब तक नहीं लेना चाहती, जब तक झामुमो यह स्पष्ट नहीं कर देता कि वह दोनों सीटों पर खुद चुनाव लड़ेगा या गठबंधन धर्म निभाते हुए एक सीट कांग्रेस के लिए छोड़ेगा. उधर झामुमो के भीतर भी मंथन जारी है. शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई सीट पर सोरेन परिवार से किसी सदस्य को भेजने की मांग जोर पकड़ रही है. अंजनी सोरेन समेत कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन पार्टी ने अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है. अंतिम निर्णय पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के स्तर पर होना है. वहीं भाजपा ने अपनी रणनीति लगभग तय कर ली है और संभावित उम्मीदवारों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी है. हालांकि संख्या बल के लिहाज से भाजपा को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी, लेकिन पार्टी नेतृत्व जीत का दावा कर रहा है. इसी कारण सत्ता पक्ष में भी सतर्कता बढ़ गई है और क्रॉस वोटिंग तथा हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं पर चर्चा तेज हो गई है.
राज्यसभा चुनाव में सस्पेंस बरकरार, झामुमो की चुप्पी से कांग्रेस की बढ़ी बेचैनी
फिलहाल झारखंड की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि झामुमो क्या फैसला लेता है. जब तक झामुमो अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं करता, तब तक कांग्रेस की रणनीति भी अधर में लटकी रहेगी. नामांकन के तीसरे दिन तक पर्चा नहीं बिकना इसी राजनीतिक अनिश्चितता का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है.
