RANCHI/GIRIDIH : गिरिडीह की प्रसिद्ध बाबाजी कुटिया की जमीन को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है. जमीन पर कथित तौर पर कब्जे की कोशिश की आशंका के बीच आसपास के करीब 10 गांवों के ग्रामीण एकजुट हो गए हैं. ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी आस्था और परंपरा से जुड़ी इस जमीन पर कब्जे या अतिक्रमण की कोशिश हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे.
आस्था और परंपरा से जुड़ी है बाबाजी कुटिया की जमीन
बताया जाता है कि बाबाजी कुटिया की यह जमीन लंबे समय से ग्रामीणों की आस्था का केंद्र रही है. यहां कभी एक बाबा रहा करते थे. उनके निधन के बाद यह स्थान धीरे-धीरे आसपास के गांवों के लोगों के लिए श्रद्धा और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया.
ग्रामीणों के अनुसार, करीब 10 गांवों के लोग इस जमीन का इस्तेमाल विभिन्न धार्मिक और सामूहिक कार्यों के लिए करते हैं. यहां ग्रामीण अपने गाय-बैल लेकर आते हैं. इसके अलावा, किसी ग्रामीण की मृत्यु होने पर श्राद्ध कर्म और अन्य पारंपरिक कार्यक्रम भी इसी स्थान पर संपन्न किए जाते हैं.
यही वजह है कि ग्रामीण इस जमीन को केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि अपनी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर मानते हैं.

कथित कब्जे की आशंका से ग्रामीणों में आक्रोश
इसी बीच बाबाजी कुटिया की जमीन पर कथित तौर पर भूमाफियाओं की नजर पड़ने की चर्चा से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है. जमीन की सुरक्षा को लेकर रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण यहां एकत्रित हुए और एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की. इस दौरान दिवंगत पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई. ग्रामीणों ने मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. इसके बाद आयोजित सभा में बाबाजी कुटिया की जमीन की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया.
ग्रामीणों ने कहा कि यह जमीन वर्षों से सामूहिक उपयोग और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है. ऐसे में किसी भी तरह के अतिक्रमण या कब्जे की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
कब्जे की कोशिश हुई तो होगा संघर्ष
सभा के दौरान ग्रामीणों ने कथित जमीन माफियाओं को चुनौती देते हुए कहा कि बाबाजी कुटिया की जमीन पर किसी भी तरह का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अगर किसी ने जमीन पर कब्जे की कोशिश की, तो आसपास के सभी गांवों के लोग एकजुट होकर विरोध करेंगे. ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर वे आर-पार की लड़ाई लड़ने से भी पीछे नहीं हटेंगे. उनका कहना है कि यह जमीन केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों से चली आ रही सामूहिक परंपराओं का हिस्सा है.
प्रशासन से जांच और जमीन की सुरक्षा की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में विवाद और गहरा सकता है. ऐसे में प्रशासन की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
अब प्रशासन के अगले कदम का इंतजार
बाबाजी कुटिया की जमीन को लेकर ग्रामीणों की एकजुटता ने इस मामले को चर्चा में ला दिया है. एक तरफ ग्रामीण अपनी आस्था, परंपरा और सामूहिक उपयोग से जुड़ी जमीन की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कथित कब्जे की आशंका को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है. फिलहाल जमीन के स्वामित्व, कथित कब्जे की कोशिश और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है. अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों की मांगों पर क्या कार्रवाई होती है. ग्रामीणों का संदेश साफ है: बाबाजी कुटिया की जमीन पर कब्जे की कोशिश हुई, तो सभी गांव एकजुट होकर विरोध करेंगे.
इसे भी पढ़े : एक रात, चार घर और लाखों की चोरी! आखिर देवरी में चोरों ने कैसे मचाया आतंक?
