RANCHI / JAMSHEDPUR : शहर में हुए भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की मौत के बाद अब सवाल सिर्फ हादसे की वजह को लेकर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और व्यवस्था की लापरवाही को लेकर भी उठ रहे हैं. सामने आई जानकारी के मुताबिक, हादसे में शामिल ट्रक रात करीब 10 बजे से 2 बजकर 35 मिनट तक सड़क पर खड़ा था. यानी करीब साढ़े चार घंटे तक ट्रक सड़क पर मौजूद रहा.

सड़क पर किसी वाहन के खराब होने या दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में उसे लंबे समय तक उसी जगह छोड़ना गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है. उपलब्ध दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ऐसे वाहन के पीछे रिफ्लेक्टिव ट्रायंगल और चेतावनी संकेत लगाए जाने चाहिए, ताकि पीछे से आने वाले वाहन चालकों को खतरे की जानकारी मिल सके.
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सड़क पर खड़े वाहन को हटाने की जिम्मेदारी किसकी?
दिशा-निर्देशों में दुर्घटनाग्रस्त या खराब वाहन को सड़क से हटाने की व्यवस्था का भी उल्लेख है. इसके तहत पुलिस और परिवहन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. वाहन चालकों को भी निर्देश दिया गया है कि मदद पहुंचने तक वाहन के चारों इंडिकेटर चालू रखें और पीछे से आने वाले वाहनों को पर्याप्त दूरी से चेतावनी देने की व्यवस्था करें.
ऐसे में जमशेदपुर हादसे में सबसे अहम सवाल है कि अगर ट्रक रात 10 बजे से सड़क पर खड़ा था, तो उसे 2:35 बजे तक क्यों नहीं हटाया गया? क्या ट्रक के पीछे पर्याप्त चेतावनी संकेत लगाए गए थे? क्या पुलिस को इसकी जानकारी थी? अगर जानकारी थी, तो वाहन को हटाने में करीब साढ़े चार घंटे क्यों लगे?
क्या समय रहते ट्रक हट जाता तो टल सकता था हादसा?
यह सवाल अभी जांच का विषय है। बिना जांच के यह कहना संभव नहीं है कि ट्रक को पहले हटा दिया जाता तो हादसा निश्चित रूप से टल जाता. लेकिन इतना जरूर है कि सड़क पर लंबे समय तक खड़े वाहन से पैदा होने वाले खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. चार लोगों की मौत के बाद अब जांच में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि हादसे से पहले सड़क पर ट्रक की स्थिति क्या थी, सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे और संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी थी या नहीं.
क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं कि हादसा कैसे हुआ? सवाल यह भी है कि हादसे से पहले खतरा मौजूद था, तो उसे दूर करने के लिए क्या किया गया? चार जिंदगियां चली गईं. अब जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होना चाहिए कि कहीं किसी स्तर पर हुई लापरवाही ने इस हादसे के खतरे को बढ़ाया तो नहीं.
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