Akshay Kumar Jha
RANCHI : राज्य सरकार की तरफ से हमेशा यह आरोप लगता रहता है कि केंद्र की तरफ से झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार होता है. हमेशा से देखा गया है कि विभाग के कई मंत्री केंद्र के मंत्रियों से मिलकर केंद्रांश देने का अनुरोध करते हैं. इसी कड़ी में ग्रामीण विकास विभाग के पंचायती राज विभाग को थोड़ी राहत मिली है. केंद्र सरकार की तरफ से विभाग को 687 करोड़ रुपए दिए गए हैं. इस राशि में 412 करोड़ राशि ऐसी योजनाओं पर खर्च होंगे जो केंद्र की तरफ से पहले से तय है. वहीं 275 करोड़ पंचायती राज के दूसरे विकास के काम पर खर्च किए जाएंगे.
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जानें कहां खर्च होंगे 275 करोड़
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत झारखंड राज्य को ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLB) के लिए 27512.53 लाख रुपये (लगभग 275.12 करोड़ रुपये) की बेसिक (अनटाइड) अनुदान राशि जारी की है. यह राशि वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी किस्त के रूप में जारी की गई है. यह अनुदान राज्य के पात्र ग्राम पंचायतों, प्रखंड पंचायतों और जिला परिषदों को उनके विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्राप्त अनुदान राशि को बिना किसी कटौती के दस कार्यदिवस के भीतर संबंधित ग्रामीण निकायों को हस्तांतरित किया जाए. यदि निर्धारित समय सीमा के बाद राशि जारी की जाती है, तो राज्य सरकार को ब्याज सहित भुगतान करना होगा. यह बेसिक अनुदान “अनटाइड” है, अर्थात् स्थानीय निकाय इसे अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों पर विकास कार्यों के लिए उपयोग कर सकते हैं. हालांकि, इस राशि का उपयोग वेतन या अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए नहीं किया जा सकेगा.
जानें कहां खर्च होंगे 412 करोड़
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने पंद्रहवें वित्त आयोग (FC-XV) की अनुशंसा के तहत झारखंड राज्य को ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) के लिए 41268.79 लाख रुपये (₹412.68 करोड़) की बंधित मूल अनुदान (Tied Basic Grant) राशि जारी करने की स्वीकृति प्रदान की है. यह राशि वर्ष 2024-25 की प्रथम किस्त के रूप में जारी की गई है. यह अनुदान 4342 ग्राम पंचायतों, 253 प्रखंड पंचायतों तथा राज्य की सभी 24 जिला परिषदों के लिए स्वीकृत किया गया है. यह राशि स्वच्छता, खुले में शौच से मुक्ति की स्थिति के रखरखाव, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन एवं जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सेवाओं पर व्यय की जाएगी.
राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि केंद्र से राशि प्राप्त होने के दस कार्य दिवसों के भीतर बिना किसी कटौती के संबंधित ग्रामीण स्थानीय निकायों को हस्तांतरित की जाए. विलंब की स्थिति में राज्य को निर्धारित ब्याज दर के अनुसार ब्याज सहित राशि जारी करनी होगी.
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