RANCHI : झारखंड में स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान में लापरवाही का मामला सामने आया है. झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने सर्वे और सत्यापन कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर 14 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
JEPC की ओर से 2 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, 7 जुलाई से 7 सितंबर तक स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान के लिए विशेष सर्वेक्षण अभियान चलाया जाना था. इसके तहत घर-घर जाकर सर्वे, कार्यस्थलों पर बच्चों की पहचान और यू-डाइस ड्रॉप बॉक्स में दर्ज स्कूल छोड़ चुके बच्चों का सत्यापन किया जाना था.
इस अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों की पहचान करना नहीं, बल्कि उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ना और जरूरत के अनुसार राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) में नामांकन कराना भी था.
पहले भी हजारों बच्चों की हुई थी पहचान
राज्य में इससे पहले किए गए सर्वे में बड़ी संख्या में स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान की गई थी. उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 19,862 आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों की पहचान हुई थी. इनमें से 9,560 बच्चों का नामांकन कराया जा चुका था. ऐसे में अब शेष बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना विभाग के सामने बड़ी चुनौती है.
27 अगस्त को दोबारा मांगा गया था जवाब
सर्वेक्षण कार्य की धीमी गति को देखते हुए JEPC ने 27 अगस्त को संबंधित जिलों से दोबारा जवाब मांगा था. इसके बावजूद रांची को छोड़कर संबंधित जिलों से समय पर जवाब नहीं मिलने और सर्वेक्षण कार्य पूरा नहीं होने की बात सामने आई.
जिन 14 जिलों के अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें पाकुड़, दुमका, पलामू, गोड्डा, पश्चिमी सिंहभूम, देवघर, खूंटी, गिरिडीह, गुमला, साहेबगंज, धनबाद, लोहरदगा, गढ़वा और लातेहार शामिल हैं.
कागजों पर 100 फीसदी प्रगति, जमीन पर सवाल
16 सितंबर को हुई राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में जिलों की प्रगति की समीक्षा की गई. इसमें बैठकों, लोगों की भागीदारी और अभिभावक-शिक्षक बैठकों जैसी गतिविधियों में 100 फीसदी प्रगति दर्ज होने की बात सामने आई.
हालांकि, जब स्कूल से बाहर बच्चों की वास्तविक पहचान और उनके नामांकन की स्थिति की समीक्षा की गई, तो तस्वीर अलग नजर आई. समीक्षा में यू-डाइस ड्रॉप बॉक्स में दर्ज स्कूल छोड़ चुके बच्चों और पहले से चिन्हित आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों को लेकर अपेक्षित चर्चा और कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई.
28 सितंबर तक देना होगा जवाब
JEPC ने संबंधित अधिकारियों को 28 सितंबर तक अपना स्पष्टीकरण राज्य मुख्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. तय समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने पर मामले को प्रशासनिक कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा.
अब सवाल यह है कि जब कागजों पर कई गतिविधियों में 100 फीसदी प्रगति दर्ज की गई, तो जमीन पर कई बच्चे अब भी स्कूल से बाहर क्यों हैं? आने वाले दिनों में विभाग की कार्रवाई और जिलों की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण से इस मामले की तस्वीर और साफ होगी.
