RANCHI : झारखंड के बोकारो के रहने वाले और सैनिक स्कूल तिलैया के पूर्ववर्ती छात्र लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार ने भारतीय सेना के पर्वतारोहण अभियान का नेतृत्व करते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उनके नेतृत्व में सेना के 28 सदस्यीय दल ने उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में 6512 मीटर ऊंची माउंट भागीरथी चोटी पर तिरंगा फहराया. 22 सितंबर को पूरी हुई इस चढ़ाई के दौरान टीम को भारी बर्फबारी, तेज हवाओं और हिमस्खलन के खतरे का सामना करना पड़ा.
10 घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद चोटी पर पहुंचा सेना का दल
भारतीय सेना के पर्वतारोहण दल ने कठिन परिस्थितियों के बीच माउंट भागीरथी की चोटी तक पहुंचकर अभियान को सफल बनाया. 22 सितंबर को दल के 28 सदस्य 6512 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचे और तिरंगा फहराया. इस अभियान के दौरान पर्वतारोहियों को भारी बर्फबारी, तेज हवाओं, कड़ाके की ठंड और बर्फीली दरारों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसके अलावा, पूरे अभियान के दौरान हिमस्खलन का खतरा भी बना रहा. करीब 10 घंटे की बेहद कठिन चढ़ाई के बाद टीम ने अपने लक्ष्य को हासिल किया.
मौसम खराब होने पर बदली अभियान की रणनीति
अभियान के दौरान खराब मौसम के कारण पर्वतारोहण दल को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा. टीम ने पहले माउंट सतोपंथ पर चढ़ाई करने की योजना बनाई थी, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए इस अभियान को रोक दिया गया. इसके बाद टीम ने माउंट भागीरथी की ओर बढ़ने का फैसला लिया. कठिन परिस्थितियों के बावजूद दल ने आपसी तालमेल और साहस के साथ चढ़ाई पूरी की.
55 से ज्यादा चोटियों पर अभियान कर चुके हैं जय प्रकाश कुमार
लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार लंबे समय से पर्वतारोहण के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वह वर्ष 2009 से पर्वतारोहण कर रहे हैं और अब तक 55 से अधिक चोटियों पर अभियान का हिस्सा बन चुके हैं. उनकी उपलब्धियों में वर्ष 2019 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट और वर्ष 2024 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर सफल चढ़ाई भी शामिल है.
बोकारो और झारखंड के लिए गौरव का क्षण
लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार की इस उपलब्धि से बोकारो और झारखंड का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया है. सैनिक स्कूल तिलैया के पूर्ववर्ती छात्र के रूप में उन्होंने सेना में नेतृत्व और पर्वतारोहण के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है. माउंट भागीरथी की चोटी पर तिरंगा फहराने वाला यह अभियान भारतीय सेना के साहस, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में लक्ष्य हासिल करने के संकल्प को दर्शाता है.
