RANCHI : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में कथित अनियमितताओं की जांच अब और तेज हो गई है. फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर एडमिशन लेने के मामले में CID ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है. शुरुआत में जहां जांच केवल तीन छात्रों के नामांकन तक सीमित थी. वहीं अब यह बढ़कर करीब 25 छात्रों तक पहुंच गई है. CID सभी संबंधित छात्रों से पूछताछ करेगी और उनके बयान दर्ज करेगी. जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि प्रवेश प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ और इसमें किन किन लोगों की भूमिका रही.

3 से बढ़कर 25 एडमिशन CID के रडार पर, सफाई टेंडर की भी खुली जांच
इधर CID की दूसरी टीम ने रिम्स में सफाई टेंडर से जुड़े मामलों की भी जांच शुरू कर दी है. टीम ने अस्पताल प्रबंधन से निविदा प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों की जांच की और कई अहम रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं. जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि टेंडर प्रक्रिया में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता हुई या नहीं. रिम्स में एक साथ एडमिशन और टेंडर से जुड़े मामलों की जांच तेज होने से अस्पताल प्रशासन में हलचल मची हुई है. सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कई अधिकारियों. कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है. यदि फर्जी प्रमाणपत्र या टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप सही पाए जाते हैं. तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
CID की कार्रवाई ने रिम्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है. क्योंकि उसी के आधार पर यह तय होगा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार कौन हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है.
