रांची : झारखंड के वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य की राजनीति में विवाद गहराता जा रहा है. इस मुद्दे पर अब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार तथा पुलिस व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से वित्तमंत्री को सलाह देते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए.

यह विवाद उस समय और बढ़ गया, जब वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर असंतोष जताते हुए सरकार को पत्र लिखा. उनका कहना था कि सुरक्षा से जुड़े आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इसी नाराज़गी के बीच उन्होंने अपनी सुरक्षा वापस करने का भी निर्णय लिया था.
बाबूलाल मरांडी ने क्या कहा ?
बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि वित्तमंत्री को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखने के बजाय झारखंड पुलिस के एएसआई अजय सिंह के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए.
उन्होंने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए लिखा,
आदरणीय मंत्री @radhakkofficial जी, आप भी किन कागज़ी चक्करों में फंसे हुए हैं?
आप जवानों को बैठाने के लिए DG साहब को पत्र लिख रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि झारखंड पुलिस में DG और IG की अब कोई हैसियत ही नहीं बची है! पूरा पदानुक्रम ध्वस्त हो चुका है। मेरी बात मानिए, सीधे अजय सिंह… pic.twitter.com/MgEo1PkYGe
— Babulal Marandi (@yourBabulal) July 4, 2026
“राधाकृष्ण किशोर जी, आप भी किन कागज़ी चक्करों में फँसे हुए हैं ? आप जवानों को बैठाने के लिए डीजी साहब को पत्र लिख रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि झारखंड पुलिस में डीजी और आईजी की अब कोई हैसियत ही नहीं बची है. पूरा पदानुक्रम ध्वस्त हो चुका है. मेरी बात मानिए, सीधे अजय सिंह (एएसआई) के दरबार में अर्जी लगाइए. आपकी गाड़ी, गार्ड और एस्कॉर्ट सब एक झटके में आवंटित हो जाएगा.”
पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल
मरांडी ने आगे दावा किया कि राज्य के एक एडीजी स्तर के अधिकारी पहले ही यह स्वीकार कर चुके हैं कि झारखंड पुलिस में बिना एएसआई अजय सिंह की सहमति के कोई निर्णय नहीं होता.
उन्होंने लिखा,
“जब राज्य के एक एडीजी स्तर के अधिकारी स्वयं यह स्वीकार कर चुके हों कि अजय सिंह की इच्छा के बिना झारखंड पुलिस में एक पत्ता तक नहीं हिलता, तो फिर डीजीपी को पत्र लिखने का क्या औचित्य है ? “
हालाँकि, बाबूलाल मरांडी के इस दावे पर पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
शर्मिंदा तो पूरा सिस्टम है
पूर्व मुख्यमंत्री ने वित्तमंत्री की नाराज़गी का उल्लेख करते हुए राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने लिखा,
“एक कैबिनेट मंत्री को सुरक्षा कर्मियों के लिए चौथी गाड़ी तो दूर, उनकी पहले से उपलब्ध गाड़ी भी वापस माँगी जाती है. आपने इसे अपने लिए शर्मिंदगी बताया, लेकिन वास्तव में शर्मिंदा तो झारखंड का पूरा प्रशासनिक तंत्र है, जो पूरी तरह चरमरा चुका है.”
सरकार पर भी बोला हमला
अपने पोस्ट के अंत में बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि वर्तमान व्यवस्था अधिकारियों के बजाय कुछ प्रभावशाली लोगों के इशारों पर चल रही है.
उन्होंने कहा
“मंत्री जी, अब यह सरकार और यह महकमा अधिकारियों से नहीं चल रहा है। डीजीपी को पत्र लिखने के बजाय अपनी गाड़ी और सुरक्षा की समस्या उस एएसआई के सामने रखिए, जिसके इशारों पर पूरी व्यवस्था चल रही है।”
विवाद क्यों महत्वपूर्ण है ?
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब झारखंड सरकार के भीतर प्रशासनिक समन्वय और अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. हाल के दिनों में कई मंत्रियों ने भी विभिन्न विभागों के कामकाज पर सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त किया है.
फिलहाल, बाबूलाल मरांडी के आरोपों पर राज्य सरकार या झारखंड पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है और वित्तमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है.
