RANCHI : खनिज संपदा से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार ने बड़ा कानूनी बदलाव किया है. विधि मंत्रालय की ओर से Mines and Minerals (Development and Regulation) Act (MMDR Act) में किए गए संशोधन से संबंधित गजट प्रकाशित किया गया है. संशोधन में अधिनियम की कुछ धाराओं में बदलाव किया गया है, जिसका सीधा असर खनिज वाली जमीन पर राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स और सेस पर पड़ सकता है.
धारा 2, 3 और 9C में बदलाव
गजट में दिए गए प्रावधानों के मुताबिक MMDR Act की धारा 2, 3 और 9C में संशोधन किया गया है. इसके साथ ही धारा 9C में नया प्रावधान 9D(1) जोड़ा गया है.इस प्रावधान के तहत खनिजों वाली जमीन को लेकर राज्य सरकारों की ओर से किसी भी नाम से टैक्स या सेस लगाने पर रोक का प्रावधान किया गया है.
किसी भी नाम से टैक्स लगाने पर रोक
संशोधित प्रावधान का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि खनिज संपदा वाली जमीन पर राज्य सरकारें अलग-अलग नाम देकर किसी तरह का अतिरिक्त टैक्स या सेस नहीं लगा सकेंगी.इसका असर उन राज्यों पर पड़ सकता है, जहां खनिज संसाधनों से जुड़े राजस्व को लेकर राज्य और केंद्र के बीच अधिकारों को लेकर विवाद रहे हैं.
न्यायिक आदेश से भी प्रभावित नहीं होगा संशोधन
गजट में यह भी प्रावधान किया गया है कि संशोधन के तहत किए गए बदलाव किसी न्यायिक आदेश से प्रभावित नहीं होंगे. यानी संबंधित प्रावधानों को इस तरह तैयार किया गया है कि वे अदालतों के पूर्व या भविष्य के आदेशों के बावजूद लागू रह सकें. हालांकि, इस प्रावधान की वास्तविक कानूनी व्याख्या और इसके दायरे को लेकर आगे न्यायिक चुनौती की स्थिति बनती है या नहीं, यह संबंधित मामलों और अदालतों के फैसलों पर निर्भर करेगा.
राज्यों के राजस्व पर पड़ सकता है असर
खनिज संपदा वाले राज्यों के लिए यह संशोधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि खनन गतिविधियों से मिलने वाला राजस्व राज्यों की आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. अब बड़ा सवाल यह होगा कि संशोधित प्रावधानों का राज्यों की मौजूदा कर और सेस व्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा और खनिज संपदा से जुड़े राजस्व अधिकारों को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच आगे क्या स्थिति बनती है. फिलहाल संशोधन से संबंधित गजट प्रकाशित हो चुका है. अब इसकी कानूनी व्याख्या और राज्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर स्थिति धीरे-धीरे स्पष्ट होगी.
