RANCHI: JSSC-CGL विवाद अब परीक्षा और नियुक्तियों से आगे बढ़कर सियासी टकराव का मुद्दा बन गया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पुराने बयान को सामने रखते हुए सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने सवाल किया है कि जब सरकार खुद दोषियों को कड़ी सजा देने की बात करती थी, तो अब छात्र CBI जांच की मांग कर रहे हैं, ऐसे में सरकार इस जांच से पीछे क्यों हट रही है.
पुराने बयान को बनाया राजनीतिक हथियार
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री के 6 नवंबर 2024 के बयान का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि उस समय मुख्यमंत्री ने युवाओं से जुड़े मामलों में गड़बड़ी मिलने पर आरोपियों को 5 नहीं, बल्कि 50 साल तक जेल भेजने की बात कही थी. बाबूलाल के मुताबिक, उस समय उन्होंने JSSC-CGL में कथित तौर पर 25 लाख रुपये में सीट बेचने का आरोप लगाया था. उनका दावा है कि इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने CBI और ED से जांच कराने की चुनौती दी थी.

अब CBI जांच पर सवाल क्यों?
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आज वही युवा और अभ्यर्थी JSSC-CGL मामले में CBI जांच की मांग कर रहे हैं. ऐसे में सरकार को उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि अगर सरकार को भरोसा है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, तो फिर पूरे मामले की जांच CBI को सौंपने में क्या परेशानी है.
‘मुद्दा सिर्फ परीक्षा का नहीं, युवाओं के भविष्य का है’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि JSSC-CGL का विवाद अब सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है. इसका सीधा असर उन युवाओं पर पड़ रहा है, जिन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस मामले को लेकर पहले सवाल उठाए गए थे, तब विरोध करने वालों को भाजपा प्रायोजित कोचिंग माफिया और PIL गैंग तक कहा गया. अब जब अभ्यर्थी खुद निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, तो सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए.
‘50 साल की सजा नहीं, निष्पक्ष जांच चाहिए’
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वे किसी आरोपी को 50 साल जेल भेजने की मांग नहीं कर रहे हैं. उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जो भी दोषी मिले, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके पुराने बयान पर कायम रहने और JSSC-CGL विवाद की CBI जांच की अनुशंसा करने की मांग की है. JSSC-CGL को लेकर एक तरफ चयनित अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ CBI जांच की मांग भी लगातार उठ रही है. ऐसे में सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है, यह आने वाले दिनों में इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है.
