RANCHI : किसी मां को अपने बच्चों का पेट पालना है, किसी महिला को अपने परिवार का सहारा बनना है. इसी उम्मीद में हर सुबह वे घर से निकलती हैं. लेकिन जब घर लौटने का सफर ही जानलेवा जोखिम से भर जाए, तो सवाल सिर्फ यातायात नियमों का नहीं, बल्कि उन मजबूरियों का भी है, जिनसे हर दिन इन महिलाओं को जूझना पड़ता है.
रांची के आसपास के ग्रामीण इलाकों से मजदूरी की तलाश में शहर आने वाली महिलाओं की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. तस्वीर में कई महिलाएं एक टेकर के पीछे लटककर सफर करती नजर आ रही हैं. यह तस्वीर उस हकीकत की ओर इशारा करती है, जहां रोजी-रोटी की जरूरत और सुरक्षित परिवहन की कमी के बीच महिलाओं को जोखिम भरा सफर करना पड़ता है.

मेहनत उनकी, जोखिम भी उनका… फिर सुरक्षित सफर क्यों नहीं?
सुबह काम की तलाश में घर से निकलना और शाम को थके कदमों से वापस लौटना. इन महिलाओं के लिए यह रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. लेकिन जब वाहन में बैठने की जगह नहीं मिलती, तो घर पहुंचने के लिए उन्हें खतरनाक तरीके से सफर करते देखा जाता है. चलते वाहन के पीछे लटककर यात्रा करना किसी भी वक्त बड़े हादसे की वजह बन सकता है. अचानक ब्रेक लगने या वाहन के संतुलन बिगड़ने से जान तक जा सकती है. ऐसे में सवाल उठता है कि परिवार की जिम्मेदारी उठाने वाली इन महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
क्या ग्रामीण इलाकों से शहर आने-जाने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक वाहन उपलब्ध हैं? क्या मजदूरों की आवाजाही वाले रूटों पर परिवहन सुविधाओं की जरूरत का आकलन किया गया है? वायरल तस्वीर ने इन सवालों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.
वायरल तस्वीर पर परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने लिया संज्ञान
मामले के सामने आने के बाद राज्य के परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने संज्ञान लिया है. उन्होंने रांची ट्रैफिक पुलिस को तत्काल कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के निर्देश दिए हैं.
मंत्री ने अधिकारियों से तत्परता से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है. हालांकि, इस मामले में कार्रवाई की वर्तमान स्थिति और संबंधित वाहन के खिलाफ उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है.
जयराम महतो ने भी जताई चिंता
विधायक जयराम महतो ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस वीडियो को साझा किया. उन्होंने सड़क पर इस तरह चलने वाले वाहनों को दुर्घटना का खतरा बताते हुए वाहन मालिकों और आम लोगों से सावधानी बरतने की अपील की.
सिर्फ चालान नहीं, सुरक्षित सफर का इंतजाम भी जरूरी
नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन क्या इससे समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा? यदि ग्रामीण क्षेत्रों से मजदूरी के लिए शहर आने वाली महिलाओं को पर्याप्त परिवहन सुविधा नहीं मिलती, तो उनकी रोजाना की परेशानी दूर करने के लिए व्यापक व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा.
ग्रामीण रूटों पर सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता बढ़ाना, भीड़भाड़ वाले वाहनों पर निगरानी रखना और कामकाजी लोगों की जरूरतों के अनुसार परिवहन व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है. क्योंकि इन महिलाओं के लिए सफर सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का जरिया नहीं, बल्कि परिवार की रोजी-रोटी से जुड़ा सवाल है.
जिस मेहनत से घर का चूल्हा जलता है, उस मेहनत करने वाली महिला की जान भी उतनी ही कीमती है. अब देखना होगा कि वायरल तस्वीर पर हुई कार्रवाई के निर्देश जमीन पर कितना असर दिखाते हैं और क्या इन महिलाओं को सुरक्षित सफर का अधिकार मिल पाता है.
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