RANCHI : खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर झारखंड में सियासी बहस तेज है. केंद्र सरकार जहां इस संशोधन को खनन क्षेत्र में एक समान और पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था लाने की दिशा में कदम बता रही है, वहीं झारखंड सरकार और विपक्षी दलों की ओर से राज्य के अधिकार और खनिज राजस्व को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. इसी मुद्दे पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा की ओर से कहा गया कि संशोधन का उद्देश्य देशभर में खनन क्षेत्र के लिए एक समान व्यवस्था तैयार करना है. वक्ता ने दावा किया कि इससे खनन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को नीतिगत अनिश्चितता और अलग-अलग स्तर पर लगाए जाने वाले करों से राहत मिलेगी.
केंद्र का दावा- एक समान वित्तीय व्यवस्था से निवेश को बढ़ावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि संशोधन के जरिए खनिज क्षेत्र में एक समान और पारदर्शी वित्तीय ढांचा तैयार करने का प्रयास किया गया है. केंद्र सरकार के अनुसार, संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में स्थिरता, पारदर्शिता और निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है. भाजपा की ओर से दावा किया गया कि नई व्यवस्था से उद्योगों को लंबे समय की योजना बनाने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही राज्य में नए उद्योग आने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई गई.
पिछली तारीख से कर लगाने को लेकर भी उठाया मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ता ने खनन क्षेत्र में पिछली तारीख से कर या अन्य लेवी लगाए जाने को लेकर भी सवाल उठाया. उनका कहना था कि ऐसी व्यवस्था से कारोबारियों के बीच अनिश्चितता पैदा होती है और कानूनी विवाद बढ़ते हैं. केंद्र सरकार ने भी संशोधन के पक्ष में तर्क देते हुए कहा है कि इसका एक उद्देश्य राज्यों में अलग-अलग कर व्यवस्थाओं से पैदा होने वाली असमानता को कम करना और अधिक पूर्वानुमेय वित्तीय ढांचा तैयार करना है.
झारखंड सरकार के विरोध पर भाजपा का सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड सरकार के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि दूसरे राज्यों में भी खनन गतिविधियां संचालित होती हैं और इस संशोधन को निवेश तथा पारदर्शिता के नजरिये से देखा जा रहा है. हालांकि, यह मुद्दा विवादित है. झारखंड सरकार और विपक्षी दलों का कहना है कि संशोधन से राज्यों के वित्तीय और संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. झारखंड सरकार ने इस कानून को लेकर आपत्ति जताई है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग भी की है.
राजस्व और राज्यों के अधिकार पर जारी है बहस
MMDR संशोधन को लेकर सबसे बड़ा विवाद खनिजों पर राज्य सरकारों की कर लगाने की शक्ति और भविष्य के राजस्व से जुड़ा है. केंद्र सरकार का कहना है कि संशोधन राज्यों से उनके मौजूदा अधिकार या खनिजों से मिलने वाला राजस्व पूरी तरह समाप्त नहीं करता. PIB के अनुसार, राज्यों को खनिज क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व के कई स्रोत जारी रहेंगे. वहीं, झारखंड सरकार और विपक्षी दलों का तर्क है कि नए प्रावधानों से खनिज संपदा वाले राज्यों के राजस्व और अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. इसी वजह से झारखंड में इस कानून को लेकर राजनीतिक विरोध जारी है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा की ओर से कहा गया कि संशोधन का लक्ष्य वैध खनन को बढ़ावा देना, निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है. अब इस कानून के लागू होने के बाद झारखंड के खनन क्षेत्र, राज्य के राजस्व और उद्योगों पर इसका वास्तविक प्रभाव क्या पड़ता है, इस पर नजर रहेगी.
