रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है. रांची में छात्र कई दिनों से धरने पर बैठे हैं और मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से जांच कराने की मांग कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

इसी बीच JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा यानी पीटी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और गिरफ्तारियों के बाद परीक्षा रद्द किए जाने की चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, आयोग की ओर से अभी तक पीटी परीक्षा रद्द करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
मामले की जांच कर रही झारखंड CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से लगातार पूछताछ की है. शुक्रवार को भी उनसे करीब आठ घंटे तक सवाल-जवाब किए गए. जांच एजेंसी का मुख्य ध्यान परीक्षा की प्रक्रिया, OMR शीट की सुरक्षा और निजी एजेंसी की भूमिका पर है.
OMR शीट में गड़बड़ी से जुड़े मामले ने बढ़ाई चिंता
JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच उस समय और गंभीर हो गई, जब OMR शीट से छेड़छाड़ के मामले में सुमन सौरभ को गिरफ्तार किया गया. जांच के दौरान उसके द्वारा कथित तौर पर गलत तरीके से प्रारंभिक परीक्षा पास करने की बात स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है. इस घटनाक्रम के बाद जांच एजेंसी के सामने यह सवाल है कि परीक्षा की गोपनीय सामग्री तक पहुंच कैसे बनी और OMR शीट में कथित तौर पर बदलाव किस स्तर पर हुआ.
जांच में यदि यह साबित होता है कि परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठ सकता है. यही वजह है कि अब छात्रों के बीच परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग जोर पकड़ रही है.
हालांकि, किसी परीक्षा को रद्द करने का अंतिम फैसला संबंधित आयोग और सरकार के स्तर पर जांच के निष्कर्षों तथा कानूनी स्थिति को देखते हुए ही लिया जाएगा.
मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्ति के बाद बने थे JPSC अध्यक्ष
एल खियांग्ते राज्य के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद फरवरी 2025 में JPSC के अध्यक्ष बनाए गए थे. उन्होंने 22 जुलाई 2026 को आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. इससे पहले CID ने JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में उनके आधिकारिक आवास समेत कई स्थानों पर तलाशी ली थी.
अब जांच एजेंसी उनसे परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछ रही है. शुक्रवार की पूछताछ में भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा संचालन, चयन प्रक्रिया और निजी एजेंसी की भूमिका से जुड़े सवाल शामिल रहे.
OMR शीट JPSC से निजी एजेंसी तक कैसे पहुंची ?
CID की पूछताछ में एक अहम सवाल OMR शीट की सुरक्षा से जुड़ा है. जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि परीक्षा में इस्तेमाल होने वाली OMR शीट आखिर JPSC से निजी एजेंसी TDPL के कार्यालय तक कैसे पहुंची. परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से नियम तय थे और उन नियमों का पालन किस स्तर तक हुआ, इसकी भी पड़ताल की जा रही है.
जांच एजेंसी ने यह भी जानने की कोशिश की है कि OMR शीट में कथित गड़बड़ी किस तरह हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ के दौरान एल खियांग्ते इन सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दे सके. हालांकि, इस संबंध में CID की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है.
JPSC के कुछ सदस्य भी जांच के दायरे में आ सकते हैं
जांच का दायरा अब केवल निजी एजेंसी से जुड़े लोगों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते, परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TDPL के निदेशक और कर्मचारी अभय तिवारी समेत अन्य लोगों से पूछताछ के दौरान मिली जानकारियों के आधार पर CID आयोग के कुछ सदस्यों और दूसरे लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर सकती है.
जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई और क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही थी या इसके पीछे किसी तरह की सुनियोजित गड़बड़ी थी.
CID इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ने के साथ ही जांच का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है.
विरोध के बीच JPSC मुख्य परीक्षा स्थगित
JPSC विवाद का असर संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा पर भी पड़ा है. 25 से 27 जुलाई के बीच होने वाली संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा को आयोग ने अपरिहार्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए स्थगित कर दिया। परीक्षा स्थगित किए जाने के समय विपक्षी भाजपा समेत कई संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था.
मुख्य परीक्षा स्थगित होने के बाद छात्रों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया ही जांच के घेरे में है, तो उसके आधार पर होने वाली मुख्य परीक्षा का क्या होगा.
जयपाल सिंह स्टेडियम के पास छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना
रांची में JPSC विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन भी लगातार जारी है। जयपाल सिंह स्टेडियम के पास छात्र कई दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. छात्रों की प्रमुख मांग है कि JPSC की कथित अनियमितताओं की जांच केवल राज्य की CID तक सीमित न रहे, बल्कि मामले की CBI से जांच कराई जाए.
आंदोलनकारी छात्रों ने अपने प्रदर्शन को राजनीतिक दलों से दूर रखने की बात कही है. छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों के भविष्य और परीक्षा की पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों को आंदोलन के मंच से दूर रखने की बात भी कही है.
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या रद्द होगी JPSC पीटी परीक्षा ?
JPSC विवाद में अब सबसे बड़ा सवाल 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर है. एक तरफ CID की जांच में OMR शीट से कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया है, गिरफ्तारियां हो रही हैं और आयोग के पूर्व अध्यक्ष से लगातार पूछताछ की जा रही है. दूसरी तरफ छात्र परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए CBI जांच की मांग कर रहे हैं.
ऐसे में पीटी परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने की मांग और चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। लेकिन फिलहाल परीक्षा रद्द करने का कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है. अब सबकी नजर CID की जांच और JPSC के अगले फैसले पर है. यदि जांच में यह साबित होता है कि प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया व्यापक रूप से प्रभावित हुई थी, तो आयोग के सामने परीक्षा रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने का विकल्प भी आ सकता है.
लेकिन अगर गड़बड़ी सीमित स्तर पर पाई जाती है, तो आयोग अलग रास्ता अपना सकता है। इसलिए इस समय परीक्षा रद्द होने की बात को अंतिम निर्णय मानना जल्दबाजी होगी.
