रांची : झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के पहले चरण यानी इन्यूमरेशन फेज का काम पूरा हो गया है. इस प्रक्रिया के बाद अब 5 अगस्त 2026 को प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. इस सूची में केवल उन्हीं मतदाताओं के नाम शामिल होंगे, जिनके भरे हुए और हस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है.

राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि वर्ष 2026 की मतदाता सूची में दर्ज 2 करोड़ 64 लाख 63 हजार 236 मतदाताओं में से 2 करोड़ 20 लाख 88 हजार 937 मतदाताओं के इन्यूमरेशन फॉर्म का डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया गया है. वहीं, 43 लाख 74 हजार 272 मतदाताओं के फॉर्म वापस प्राप्त नहीं हुए. ऐसे मतदाताओं के नाम 5 अगस्त को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे.
सभी मतदाताओं तक पहुंचाए गए इन्यूमरेशन फॉर्म
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि राज्य के लगभग सभी पात्र मतदाताओं तक इन्यूमरेशन फॉर्म पहुंचाए गए. कुल 2 करोड़ 64 लाख 62 हजार 345 मतदाताओं को फॉर्म उपलब्ध कराए गए, जो लगभग 100 प्रतिशत कवरेज है.
उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ), बूथ लेवल एजेंट (बीएलए), जिला निर्वाचन पदाधिकारी, निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी, स्वयंसेवकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भूमिका निभाई.
5 अगस्त से शुरू होगी दावा-आपत्ति की प्रक्रिया
के. रवि कुमार ने बताया कि 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची के साथ-साथ एएसडीडी (Absent, Shifted, Dead and Duplicate) सूची भी प्रकाशित की जाएगी. दोनों सूचियों की सॉफ्ट कॉपी सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि बीएलए-2 को हार्ड कॉपी दी जाएगी.
इसी दिन से दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू होगी. इस अवधि में जिन मतदाताओं का नाम सूची में नहीं होगा या जिनके विवरण में कोई त्रुटि होगी, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकेंगे.
43.74 लाख फॉर्म वापस क्यों नहीं आए ?
निर्वाचन विभाग के अनुसार, जिन 43.74 लाख मतदाताओं के फॉर्म वापस नहीं मिले, उनके पीछे कई कारण सामने आए हैं.इनमें सबसे अधिक 15 लाख 93 हजार 516 मतदाता ऐसे हैं, जो स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके हैं.इसके अलावा 14 लाख 60 हजार 169 मतदाता ऐसे हैं, जिनका पता नहीं चल सका या वे लंबे समय से अनुपस्थित पाए गए. विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 7 लाख 63 हजार 997 मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 4 लाख 38 हजार 560 मतदाता पहले से ही किसी अन्य स्थान की मतदाता सूची में पंजीकृत पाए गए. वहीं 1 लाख 18 हजार 30 मतदाताओं ने इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया.
विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य
निर्वाचन आयोग का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है. इसके तहत मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, दोहरी प्रविष्टि वाले तथा लंबे समय से अनुपस्थित मतदाताओं की पहचान की जाती है, ताकि मतदाता सूची में केवल पात्र मतदाताओं के नाम ही बने रहें.
हालांकि, जिन मतदाताओं का नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं होगा, उन्हें दावा-आपत्ति की अवधि के दौरान अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने का अवसर मिलेगा. जांच के बाद पात्र पाए जाने पर उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में जोड़ा जा सकता है.
एक नजर में आंकड़े
- 2026 की कुल मतदाता संख्या: 2,64,63,236
- वितरित इन्यूमरेशन फॉर्म: 2,64,62,345 (लगभग 100%)
- डिजिटाइज किए गए फॉर्म: 2,20,88,937
- वापस नहीं मिले फॉर्म: 43,74,272
वापस नहीं मिलने के प्रमुख कारण:
- मृत मतदाता – 7,63,997
- पता नहीं चला/अनुपस्थित – 14,60,169
- स्थायी रूप से स्थानांतरित – 15,93,516
- अन्य स्थान पर पहले से पंजीकृत – 4,38,560
- हस्ताक्षर करने से इनकार – 1,18,030
आगे क्या होगा ?
अब 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची जारी होगी. इसके बाद शुरू होने वाली दावा-आपत्ति प्रक्रिया के दौरान मतदाता अपने नाम जुड़वाने, हटाने या संशोधित कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे. सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद निर्वाचन आयोग अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करेगा.
