रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने झामुमो संस्थापक और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने पर खुशी जताई है. उन्होंने इसे झारखंड, झामुमो और राज्य के लोगों के लिए गर्व का विषय बताया है.
महुआ माजी ने कहा कि उनकी पार्टी ने केंद्र सरकार से शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की भी मांग की थी, क्योंकि उनका मानना है कि गुरुजी इससे भी बड़े सम्मान के हकदार हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि हर सम्मान का अपना महत्व होता है और पार्टी इस सम्मान का सम्मान करती है.

झारखंड के लिए संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता
महुआ माजी ने कहा कि शिबू सोरेन का झारखंड और यहां के लोगों के लिए योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब उनके साथ बहुत कम लोग थे, तब भी उन्होंने महाजनी प्रथा और शोषण के खिलाफ संघर्ष शुरू किया.
उनके मुताबिक, आंदोलन के शुरुआती दौर में शिबू सोरेन को पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए जंगलों में भी रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा.
महिलाओं के मुद्दों पर भी चलाया आंदोलन
झामुमो सांसद ने कहा कि शिबू सोरेन ने वर्ष 1971 के आसपास शराबबंदी और नशामुक्ति अभियान भी चलाया था. उनका उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार और सामाजिक समस्याओं को कम करना था.
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार और आदिवासी समुदायों के अधिकारों की लड़ाई शिबू सोरेन के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है.
VIDEO | Ranchi, Jharkhand: JMM Rajya Sabha MP Mahua Majhi on Padma Bhushan for Shibu Soren, says, "It is a matter of great pride for all of us, for Jharkhand and for our party. We had also requested the Centre to confer the Bharat Ratna to Guruji, as we believe he deserves an… pic.twitter.com/mZZYVqQuR6
— Press Trust of India (@PTI_News) June 23, 2026
जल ,जंगल और जमीन का सपना अब भी अधूरा
महुआ माजी ने कहा कि शिबू सोरेन के कई सपने अब भी अधूरे हैं. उन्होंने विशेष रूप से जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आज भी झारखंड की राजनीति और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं.
उनके अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के जरिए इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है.
पद्म भूषण पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा
शिबू सोरेन को पद्म भूषण दिए जाने के बाद झारखंड में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है. झामुमो इसे झारखंड आंदोलन और आदिवासी अधिकारों के लिए किए गए संघर्ष की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के रूप में देख रहा है.
वहीं पार्टी नेताओं का कहना है कि शिबू सोरेन का राजनीतिक और सामाजिक योगदान केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने देश में आदिवासी समुदायों के अधिकारों की आवाज को भी मजबूत किया.
इसे भी पढे : झारखंड के 35 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील पर संकट
