RANCHI : झारखंड के राज्यसभा चुनाव की दूसरी सीट अब राज्य की राजनीति की सबसे बड़ी पहेली बन गई है. सतह पर यह चुनाव महज नंबर गेम का मुकाबला दिखाई देता है, लेकिन सत्ता के गलियारों में चर्चा कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किस दल के पास कितने विधायक हैं, बल्कि यह भी है कि पर्दे के पीछे कौन किसके संपर्क में है और आखिरी वक्त में किसका “हिसाब-किताब” किस दिशा में जाता है.

भाजपा विधायक दल की बैठक से सात विधायक रहे नदारद, परिमल नाथवानी को लेकर तेज हुई अटकलें; अंतिम क्षणों के समीकरणों पर टिकी सबकी नजर
निर्दलीय उम्मीदवार और उद्योग जगत से जुड़े परिमल नाथवानी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है. दूसरी सीट पर जीत की तस्वीर को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट का फैसला केवल घोषित समर्थन से नहीं, बल्कि अंतिम समय की रणनीतियों और संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं से भी प्रभावित हो सकता है. इसी बीच भाजपा विधायक दल की हालिया बैठक ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पार्टी की बैठक में 24 में से केवल 17 विधायक ही शामिल हुए, जबकि सात विधायक अनुपस्थित रहे. सबसे अधिक चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रमुख आदिवासी चेहरे चंपाई सोरेन की गैरमौजूदगी को लेकर हुई. हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इसे सामान्य अनुपस्थिति बताया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं.झारखंड की राजनीति को करीब से देखने वाले जानकारों का कहना है कि राज्यसभा चुनावों में अंतिम क्षण तक समीकरण बदलना कोई नई बात नहीं है. यही वजह है कि इस बार भी राजनीतिक अंकगणित से ज्यादा “नोट गेम” की चर्चा तेज हो गई है. हालांकि कथित लेन-देन या किसी तरह के सौदेबाजी के दावों की आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में इन चर्चाओं को फिलहाल राजनीतिक अटकलों और चुनावी अफवाहों के दायरे में ही देखा जा रहा है.
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अब सबकी निगाहें मतदान के दिन पर टिकी हैं. क्या दूसरी सीट पर तयशुदा अंकगणित जीत दर्ज करेगा या फिर झारखंड की सियासत कोई नया मोड़ लेगी? इसका जवाब आने वाले घंटों में सामने होगा और उसी के साथ राज्यसभा चुनाव की यह दूसरी सीट झारखंड की राजनीति की नई पटकथा भी लिखेगी.
