Ranchi : Jharkhand High Court ने कहा है कि एक ही संस्थान से हासिल की गई समान डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों के साथ केवल अंकों के आधार पर अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता. अदालत ने शिक्षा विभाग के उस नियम को मनमाना माना, जिसमें 2007 से पहले 300 अंकों वाली ‘संगीत प्रभाकर’ डिग्री लेने वालों को नियुक्ति के लिए अयोग्य माना गया था.
जस्टिस Deepak Roshan की अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता Sucharita Mahato को आठ सप्ताह के भीतर सेवा में बहाल किया जाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्हें सभी परिणामी लाभ दिए जाएं
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क्या है मामला ?
बोकारो की रहने वाली सुचरिता महतो ने Prayag Sangeet Samiti से 1985 और 1989 में ‘संगीत प्रभाकर’ की डिग्री हासिल की थी. वर्ष 2011 में जारी भर्ती विज्ञापन के आधार पर उनकी नियुक्ति गिरिडीह में संगीत शिक्षिका के तौर पर हुई थी।हालांकि, 31 जुलाई 2020 को जिला शिक्षा पदाधिकारी ने उनकी सेवा समाप्त कर दी. विभाग का कहना था कि उनकी डिग्री सरकार से मान्यता प्राप्त नहीं है.
300 और 500 अंकों की डिग्री पर विवाद
राज्य के शिक्षा विभाग ने 14 सितंबर 2022 को एक संकल्प जारी किया था। इसमें प्रयाग संगीत समिति की 500 अंकों वाली ‘संगीत प्रभाकर’ डिग्री को स्नातक के समकक्ष मान्यता दी गई थी।लेकिन 2007 से पहले जारी 300 अंकों वाली डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को इस दायरे से बाहर रखा गया। इसी आधार पर सुचरिता महतो की नियुक्ति पर सवाल उठाया गया था.
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि जब डिग्री देने वाला संस्थान एक ही है और डिग्री का स्वरूप भी समान है, तब केवल अंकों के अंतर के आधार पर उम्मीदवारों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।अदालत ने शिक्षा विभाग की इस व्यवस्था को असंगत और मनमाना बताते हुए याचिकाकर्ता की सेवा समाप्ति को गलत ठहराया।
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