RANCHI : झारखंड की राजनीति में भाजपा नेता भानु प्रताप शाही और कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. इस राजनीतिक घमासान के केंद्र में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी हैं. अंबा प्रसाद जहां इरफान अंसारी को अपना बड़ा भाई बताकर उनके समर्थन में खड़ी नजर आ रही हैं, वहीं भानु प्रताप शाही लगातार कांग्रेस और राज्य सरकार पर निशाना साध रहे हैं. सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.

अंबा प्रसाद ने वीडियो जारी कर भाजपा और भानु प्रताप शाही पर साधा निशाना
इस पूरे विवाद की शुरुआत 2 अक्टूबर को हुई, जब अंबा प्रसाद ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया. इस वीडियो में उन्होंने भानु प्रताप शाही और भाजपा पर तीखे सवाल उठाए. अंबा प्रसाद ने सवाल किया कि जब भाजपा के वरिष्ठ नेता जयंत सिन्हा के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते थे, तब भानु प्रताप शाही कहां थे? उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति द्वारा सरकार की आलोचना किए जाने और बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी के पिता से जुड़े पुराने बयानों का भी जिक्र किया.
का जी श्री @ShahiPratap जी ? @WithCongressJH @SevadalJHK pic.twitter.com/AaIBPTjpmS
— Amba Prasad (@AmbaPrasadINC) October 2, 2026
अंबा प्रसाद ने सवाल उठाया कि ऐसे मामलों में भाजपा नेता चुप क्यों रहते हैं, जबकि इरफान अंसारी के मामले में लगातार बयानबाजी की जाती है? उन्होंने आरोप लगाया कि भानु प्रताप शाही को भाजपा की ओर से इरफान अंसारी के खिलाफ बयान देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. अंबा प्रसाद के इस बयान ने राज्य की सियासत में एक नया विवाद खड़ा कर दिया.
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भानु प्रताप शाही का पलटवार, अंबा प्रसाद को दी राजनीतिक मर्यादा में रहने की नसीहत
अंबा प्रसाद के वीडियो के सामने आने के दो दिन बाद भानु प्रताप शाही ने भी वीडियो जारी कर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि अंबा प्रसाद के राजनीतिक रूप से आगे बढ़ने से उन्हें कोई परेशानी नहीं है, लेकिन उन्हें अपनी राजनीतिक मर्यादा में रहकर बयान देना चाहिए.
प्रिय @AmbaPrasadINC जी..
आप इरफ़ान जी के साथ हैं की अपने पापा जी के साथ ??@BJP4India @BJP4Jharkhand @IrfanAnsariMLA pic.twitter.com/RWgIpjwt3p
— Bhanu Pratap Shahi (@ShahiPratap) October 4, 2026
भानु प्रताप शाही ने इस दौरान अंबा प्रसाद के पिता और पूर्व विधायक योगेंद्र साव के पुराने बयानों का जिक्र किया. उन्होंने उन बयानों के आधार पर कांग्रेस और अंबा प्रसाद पर निशाना साधा, जिनमें योगेंद्र साव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे. भानु प्रताप शाही ने यह भी कहा कि जब अंबा प्रसाद के अपने राजनीतिक परिवार में ही विवाद हैं, तो उन्हें पहले उन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए और उसके बाद विपक्ष पर सवाल उठाने चाहिए.
कांग्रेस को बताया ‘डूबता हुआ जहाज’
भाजपा नेता ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए पार्टी को ‘डूबता हुआ जहाज’ करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में पिछले वर्षों के दौरान राज्य की जो दुर्दशा हुई है, उसमें कांग्रेस की भी बड़ी भूमिका रही है. भानु प्रताप शाही ने राज्य की बदहाली के लिए कांग्रेस को 50 प्रतिशत तक जिम्मेदार ठहराया. इस तरह, अंबा प्रसाद के आरोपों के जवाब में भानु प्रताप शाही ने कांग्रेस के साथ-साथ राज्य सरकार को भी निशाने पर लिया.दोनों नेताओं के बीच जारी इस बयानबाजी ने झारखंड में सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है.
जनता के मुद्दे पीछे, व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप आगे
इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि झारखंड की राजनीति में जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कब होगी? राज्य में बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, विकास और स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे कई अहम सवाल मौजूद हैं. इसके बावजूद राजनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा नेताओं के व्यक्तिगत आरोपों और एक-दूसरे पर की जा रही टिप्पणियों के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है.
एक ओर कांग्रेस अपने नेताओं के साथ मजबूती से खड़े होने का संदेश दे रही है, तो दूसरी ओर भाजपा विपक्ष की भूमिका में राज्य सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है. हालांकि, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इन बहसों के बीच जनता के वास्तविक मुद्दे पीछे नहीं छूटने चाहिए. अब सवाल यह है कि भानु प्रताप शाही और अंबा प्रसाद के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज होगी या राजनीतिक दल जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा.
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