रांची : रांची जिले के ग्रामीण इलाकों में जमीन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अब अधिक खर्च के लिए तैयार रहना होगा. एक अगस्त 2026 से ग्रामीण क्षेत्रों की जमीन की सरकारी कीमतों (वैल्यूएशन) में 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी लागू की जाएगी. नई दरें लागू होने के बाद जमीन और मकानों की रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी, क्योंकि खरीदारों को पहले की तुलना में अधिक स्टांप शुल्क और कोर्ट फीस चुकानी होगी.राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देश के बाद रांची जिले के 1,300 से अधिक गांवों की जमीन का नया वैल्यूएशन तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
अधिकारियों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में जमीन की मौजूदा सरकारी कीमत अपेक्षाकृत अधिक है, वहां दरों में 10 प्रतिशत तक वृद्धि की जाएगी. वहीं, जिन गांवों में सरकारी योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है, वहां अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी की संभावना है.

हर दो साल में होता है मूल्यांकन
जमीन और फ्लैट की सरकारी कीमतों को बाजार मूल्य के करीब रखने के लिए सरकार समय-समय पर वैल्यूएशन की समीक्षा करती है. तय नियम के अनुसार, एक वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों और अगले वर्ष शहरी क्षेत्रों की जमीनों का पुनर्मूल्यांकन किया जाता है.
रांची जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की कीमतों में पिछली बार वर्ष 2024 में संशोधन किया गया था. इसी क्रम में अब वर्ष 2026 के लिए नई दरें तय की जा रही हैं. इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में डीलक्स अपार्टमेंट, आरसीसी छत और एसबेस्टस शीट वाले मकानों की सरकारी कीमतों में भी बढ़ोतरी होगी.
किन इलाकों में ज्यादा बढ़ सकती हैं कीमतें ?
नई दरें लागू होने के बाद रिंग रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के आसपास के क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में सबसे अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. इनमें नगड़ी, खिजरी, सिमलिया, झिरी, मेसरा, पिर्रा, नामकुम और अनगड़ा क्षेत्र के कई गांव शामिल हैं.
इन इलाकों में व्यवसायिक जमीन की सरकारी कीमत आवासीय जमीन की तुलना में लगभग दोगुनी निर्धारित की जा सकती है, जिससे व्यावसायिक उपयोग के लिए जमीन खरीदना और महंगा हो जाएगा.
रजिस्ट्री पर कितना बढ़ेगा खर्च ?
जमीन की रजिस्ट्री के दौरान खरीदारों को सरकारी वैल्यूएशन के आधार पर शुल्क देना पड़ता है. वर्तमान में रजिस्ट्री के लिए 4 प्रतिशत स्टांप शुल्क और 3 प्रतिशत कोर्ट फीस देनी होती है.
उदाहरण के तौर पर, रातू के पिर्रा मौजा में व्यवसायिक जमीन की मौजूदा सरकारी कीमत 9,15,675 रुपये प्रति डिसमिल है। यदि इसमें 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो यह बढ़कर 10,07,243 रुपये प्रति डिसमिल हो जाएगी.
ऐसी स्थिति में 10 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री पर जहां अभी करीब 6.40 लाख रुपये खर्च होते हैं, वहीं नई दर लागू होने के बाद यह खर्च लगभग 7.05 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. यानी खरीदार को करीब 65 हजार रुपये अधिक चुकाने पड़ सकते हैं.
प्रस्तावित नई दरों में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल ?
प्रस्तावित सूची के अनुसार चतरा, नेवरी, दुबलिया, खटंगा, सहेदा, हरदाग, करमा, सिमलिया, झिरी, नगड़ी, मेसरा, जयपुर, सिदरौल, खिजरी, चंदवे-कांके और पिर्रा-रातू समेत कई मौजों की जमीन की सरकारी कीमतों में संशोधन किया जाएगा.
क्या होगा इसका असर ?
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी वैल्यूएशन बढ़ने से एक ओर राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन खरीदने वाले लोगों की लागत भी बढ़ जाएगी. ऐसे में जो लोग आने वाले महीनों में जमीन खरीदने या रजिस्ट्री कराने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए 1 अगस्त से पहले निर्णय लेना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है.
