रांची : झारखंड के शहरी विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को गति देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी वित्तीय सहायता का संकेत दिया गया है. केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि अर्बन चैलेंज फंड के तहत झारखंड को करीब 1,900 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जा सकते हैं. उनका कहना है कि इस राशि के आधार पर राज्य में लगभग 7,600 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को आकार दिया जा सकता है.
रांची में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि राज्य के कई शहरों में वर्षों से कचरे के बड़े ढेर के रूप में मौजूद डंप साइटों के पुनर्विकास की योजना तैयार की जा रही है. इसके तहत रांची समेत नौ शहरों की डंप साइटों की पहचान की जा चुकी है.

डंप साइटों को नए स्वरूप में विकसित करने की योजना
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, इन डंप साइटों की वैज्ञानिक तरीके से सफाई कर उन्हें उपयोगी सार्वजनिक स्थलों में बदला जाएगा. प्रस्तावित योजनाओं के तहत इन स्थानों को स्थानीय जरूरतों और संभावनाओं के अनुरूप विकसित किया जा सकता है. कुछ जगहों को धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की भी संभावना जताई गई है.
लंबे समय से शहरों के बीचों-बीच मौजूद कचरे के पहाड़ स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण रहे हैं. ऐसे में इन स्थलों के पुनर्विकास को शहरी स्वच्छता और सौंदर्यीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
समीक्षा बैठक में किन मुद्दों पर जोर दिया गया?
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने बिजली और ऊर्जा से जुड़े कई मुद्दों पर भी राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अब भी ऐसे परिवार हैं, जहां बिजली कनेक्शन नहीं पहुंच पाया है.
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि:
- आदिवासी इलाकों के करीब 30 हजार घरों तक बिजली कनेक्शन पहुंचाने की दिशा में तेजी से काम किया जाए.
- सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने को प्राथमिकता दी जाए, ताकि बिजली खर्च में कमी लाई जा सके.
- 31 अगस्त तक सभी सरकारी बिजली मीटरों को प्रीपेड मीटर में बदलने का लक्ष्य पूरा किया जाए, जिससे बिजली चोरी और वितरण कंपनियों के वित्तीय घाटे को कम करने में मदद मिल सके.
झारखंड की जरूरतों के हिसाब से बने योजना
राज्य के नगर विकास मंत्री सुधिव्य कुमार ने कहा कि झारखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं. इसलिए योजनाएं तैयार करते समय स्थानीय जरूरतों और क्षेत्रीय विशेषताओं को ध्यान में रखना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि यदि योजनाओं का क्रियान्वयन राज्य की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाता है, तो उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा और विकास का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचेगा.
क्या बदल सकती है तस्वीर ?
यदि प्रस्तावित योजनाएं तय समय पर धरातल पर उतरती हैं, तो इससे दो स्तरों पर बदलाव देखने को मिल सकता है। एक ओर शहरों में वर्षों से मौजूद डंप साइटों का स्वरूप बदलेगा और शहरी स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में बिजली पहुंचने से लोगों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय के साथ इन परियोजनाओं के आगे बढ़ने पर आने वाले वर्षों में झारखंड के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की तस्वीर बदल सकती है.
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