RANCHI : झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंच गया है. केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति को चुनौती देते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों के खिलाफ बताया है. हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने अभी तदाशा मिश्रा को पद से हटाने का अंतिम आदेश नहीं दिया है. अदालत ने केंद्र की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है. मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने है. पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं. केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का उल्लेख करते हुए तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती दी है.
क्या है केंद्र की आपत्ति?
केंद्र सरकार का मुख्य तर्क है कि झारखंड सरकार की DGP नियुक्ति नियमावली, 2025 सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है. केंद्र के मुताबिक, DGP की नियुक्ति के लिए UPSC की प्रक्रिया और उसके जरिए तैयार किए गए पैनल का पालन किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत राज्य सरकार को UPSC द्वारा तैयार पैनल में शामिल अधिकारियों में से DGP का चयन करना होता है. केंद्र का आरोप है कि झारखंड की 2025 की नियमावली में इस प्रक्रिया से अलग व्यवस्था बनाई गई और UPSC की निर्धारित भूमिका को प्रभावित किया गया.
रिटायरमेंट से एक दिन पहले DGP बनी थीं तदाशा मिश्रा
तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को झारखंड का DGP नियुक्त किया गया था, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति अगले ही दिन यानी 31 दिसंबर 2025 को होनी थी. केंद्र ने इसी नियुक्ति पर भी सवाल उठाया है. केंद्र के मुताबिक, DGP नियुक्ति से ठीक पहले राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन कर छह महीने की न्यूनतम बची सेवा की शर्त को हटा दिया और इसके अगले दिन तदाशा मिश्रा को DGP नियुक्त कर दिया गया. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के Amicus Curiae राजू रामचंद्रन ने भी अपनी रिपोर्ट में रिटायरमेंट से एक दिन पहले तदाशा मिश्रा की DGP के रूप में नियुक्ति को प्रकाश सिंह दिशा-निर्देशों के संदर्भ में आपत्तिजनक बताया था.
केंद्र ने पिछली DGP नियुक्ति पर भी उठाए सवाल
केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में सिर्फ तदाशा मिश्रा की नियुक्ति ही नहीं, बल्कि इससे पहले हुई अनुराग गुप्ता की DGP नियुक्ति का भी मुद्दा उठाया है. केंद्र का कहना है कि झारखंड में DGP नियुक्तियों के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया. केंद्र ने अदालत से 2025 की नियमावली के तहत हुई नियुक्तियों की वैधता पर भी विचार करने का अनुरोध किया है.
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है. केंद्र सरकार तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को अवैध घोषित करने और झारखंड की 2025 की DGP नियुक्ति नियमावली को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कराने की मांग कर रही है. अदालत की ओर से अंतिम फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तदाशा मिश्रा की नियुक्ति और राज्य की नियमावली की कानूनी स्थिति क्या होगी.
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