RANCHI : झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई जारी है. मामला JSSC-CGL के विज्ञापन संख्या 10/2023 समेत अन्य नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले से जुड़ा है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को बताया कि JSSC-CGL परीक्षा में कथित तौर पर बड़े स्तर पर अनियमितता और भ्रष्टाचार सामने आया है. सरकार का कहना है कि इन्हीं परिस्थितियों में परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया.
परीक्षा कराने वाली एजेंसी पर भी उठे सवाल
सरकार की ओर से दलील दी गई कि परीक्षा व्यवस्था में गंभीर स्तर पर सिस्टम फेलियर हुआ. जिस एजेंसी को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उस पर प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखने में विफल रहने का आरोप है. वरीय अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने दावा किया कि एजेंसी के माध्यम से अभ्यर्थियों तक प्रश्नों के उत्तर पहुंचने और उन्हें नेपाल समेत अन्य स्थानों पर तैयार कराए जाने की जानकारी सामने आई है. सरकार के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए.
सरकार बोली- नियुक्ति प्रक्रिया में भरोसा जरूरी
राज्य सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि किसी भी सरकारी नियुक्ति प्रक्रिया की विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण होती है. यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े हो जाएं, तो पूरी चयन प्रक्रिया में अभ्यर्थियों और आम लोगों का भरोसा प्रभावित होता है. सरकार की ओर से कहा गया कि मामले की जांच अभी जारी है और अब तक की जांच में परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए हैं.
निर्दोष और दोषी अभ्यर्थियों को अलग करना मुश्किल: सरकार
सरकार ने अपनी दलील में कहा कि जांच के दौरान मिले दस्तावेज परीक्षा में अनियमितता और कथित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं. ऐसे में यह तय करना बेहद मुश्किल हो सकता है कि पूरी प्रक्रिया में कौन से अभ्यर्थी कथित गड़बड़ी से जुड़े थे और कौन पूरी तरह निर्दोष थे. इसी आधार पर सरकार का तर्क है कि कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों की कार्रवाई के बजाय पूरी परीक्षा रद्द करना जरूरी था.
कई याचिकाओं पर हो रही सुनवाई
JSSC-CGL परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने के खिलाफ कई याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई हैं. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य समेत विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है. अब मामले में हाईकोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह है कि परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं के आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने का राज्य सरकार का फैसला कानूनी तौर पर कितना उचित है. फिलहाल अदालत में सुनवाई जारी है और अंतिम फैसला आना बाकी है.
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