RANCHI : दुर्गा पूजा और दशहरा 2026 को लेकर झारखंड पुलिस ने पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की तैयारी शुरू कर दी है. पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इस बार पंडाल से लेकर विसर्जन घाट तक और DJ से लेकर सोशल मीडिया तक, हर स्तर पर निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है. निर्देश के मुताबिक अक्टूबर 2026 से नवरात्र यानी कलश स्थापना शुरू होगी. इसके बाद महाअष्टमी, नवमी, विजयादशमी, रावण दहन, मेला और विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटेगी. ऐसे में प्रशासन को पहले से भीड़ का आकलन कर सुरक्षा व्यवस्था तैयार रखने को कहा गया है.
पंडालों की होगी पूरी निगरानी
हर इलाके में पूजा पंडाल, मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सूची तैयार की जाएगी. लाइसेंसी और गैर-लाइसेंसी पंडालों की जानकारी जुटाने के साथ संवेदनशील पंडालों की अलग सूची बनाई जाएगी. जरूरत के हिसाब से वहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा. पुलिस को जबरन चंदा वसूली पर भी सख्ती करने का निर्देश है. स्थानीय थानों को पूजा समितियों के साथ बैठक कर नियम समझाने और अवैध वसूली पर कार्रवाई करने को कहा गया है.
विसर्जन रूट में अचानक बदलाव नहीं
विसर्जन जुलूस का रूट पहले से तय होगा और पारंपरिक रास्ते से ही जुलूस निकालने पर जोर दिया गया है. संवेदनशील इलाकों से जुलूस ले जाने से बचने और बिना जरूरत तय रूट में बदलाव नहीं करने का निर्देश है. हर जुलूस के साथ पुलिस और दंडाधिकारी की तैनाती होगी. विसर्जन घाटों पर प्रशिक्षित तैराक, गोताखोर और नाव की व्यवस्था रखने को कहा गया है. पुलिस वाहनों में वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था रखने की भी सलाह दी गई है.
DJ और भड़काऊ गानों पर नजर
धार्मिक स्थल और मिश्रित आबादी वाले इलाकों में खास निगरानी रहेगी. मस्जिद, इमामबाड़ा और ईदगाह के आसपास विसर्जन जुलूस के दौरान आपत्तिजनक या भड़काऊ गीत-संगीत पर नजर रखने को कहा गया है.
सुरक्षा प्लान में गढ़वा, पलामू, जमशेदपुर, चाईबासा और हजारीबाग की पिछली घटनाओं का भी जिक्र है. इनमें विसर्जन रूट विवाद, DJ को लेकर झड़प, पत्थरबाजी, सोशल मीडिया पोस्ट और विसर्जन के दौरान हादसे शामिल हैं. जमशेदपुर के 2023 के विसर्जन हादसे में दो लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने का भी उल्लेख किया गया है.
सोशल मीडिया पर अफवाह फैली तो तुरंत कार्रवाई
भीड़ वाले पंडालों और मेलों में छेड़खानी, छिनतई और पॉकेटमारी रोकने के लिए पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी. खोया-पाया केंद्र बनाने और बच्चों की जेब में नाम-पता और फोन नंबर की पर्ची रखने की अपील करने को कहा गया है. WhatsApp समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक, भ्रामक या अफवाह फैलाने वाली पोस्ट पर नजर रहेगी. जरूरत पड़ने पर तत्काल खंडन जारी करने और कंट्रोल रूम को सूचना देने का निर्देश है. इसके अलावा अवैध शराब, जुआ, पशु तस्करी, अवैध बूचड़खानों और प्रतिबंधित मांस से जुड़ी गतिविधियों पर भी कार्रवाई होगी.
प्रशासन शांति समिति, जनप्रतिनिधियों और सभी समुदायों के लोगों के साथ बैठक कर पुराने विवादों को पहले ही सुलझाने की कोशिश करेगा. यानी इस बार पुलिस का फोकस सिर्फ पूजा के दिनों में बल बढ़ाने पर नहीं, बल्कि पंडाल से लेकर विसर्जन घाट और सोशल मीडिया तक हर संभावित खतरे पर पहले से नजर रखने पर है.
इसे भी पढ़े : आदिवासी बच्चों के आधे बाल काटे गए… सवाल सिर्फ बालों का नहीं, सम्मान और व्यवस्था का है
